कवर्धा। कबीरधाम जिले के बोड़ला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम खड़ौदा कला में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर में उस समय भारी हंगामा हो गया, जब एक ग्रामीण अपनी समस्या लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के पास पहुंचा। घटना के बाद जिले में पत्रकार सुरक्षा और आम नागरिकों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
*वीडियो बनाने पर भड़के कार्यकर्ता, कॉलर पकड़ने का आरोप*
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शिविर में पहुंचे एक ग्रामीण ने अपनी समस्या को रिकॉर्ड करने के लिए जैसे ही मोबाइल कैमरा ऑन किया, वहां मौजूद कुछ भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए। कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण को वीडियो बनाने से रोका। आरोप है कि इस दौरान ग्रामीण के साथ धक्का-मुक्की की गई और उसका कॉलर तक पकड़ा गया।
बीच-बचाव करने पर पत्रकार को मिली धमकी: “देख लूंगा…”
मौके पर मौजूद स्थानीय पत्रकार अभिषेक वर्मा ने जब इस दुर्व्यवहार का विरोध किया और कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए वीडियो बनाने का अधिकार है, तो मामला और बिगड़ गया।
आरोप है कि बोड़ला ब्लॉक के ग्राम बघर्रा के सरपंच एवं सरपंच संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राजेश ने पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने पत्रकार को सरेआम धमकी देते हुए कहा— “तुम्हें देख लूंगा, पत्रकार हो तो क्या कर लोगे।”
“*डिप्टी सीएम ने बताया ‘आपसी मामला’, सुरक्षाकर्मियों ने बंद कराया कैमरा*
पीड़ित पत्रकार अभिषेक वर्मा ने घटना की तुरंत लिखित व मौखिक शिकायत मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से की। पत्रकार का आरोप है कि जब वे शिकायत कर रहे थे, तब डिप्टी सीएम के सुरक्षाकर्मियों ने उनका मोबाइल कैमरा जबरन बंद करवा दिया। वहीं, उपमुख्यमंत्री की ओर से इस संवेदनशील मामले पर कथित रूप से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि “यह आपका आपसी मामला है।”
प्रशासनिक व्यवस्था और सुशासन पर उठे 3 बड़े सवाल
इस पूरी घटना के बाद कबीरधाम जिले के पत्रकार जगत और आम जनता में भारी आक्रोश है। कार्यक्रम के नाम और उद्देश्य को लेकर अब *सीधे शासन-प्रशासन पर सवाल दाग जा रहे हैं:*
सवाल 1: क्या ‘सुशासन तिहार’ जैसे सरकारी आयोजन सिर्फ सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं के लिए हैं?
सवाल 2: अगर आम जनता अपनी फरियाद लेकर सरकार के सामने खुलकर नहीं आ सकती, तो इस ‘सुशासन’ का क्या औचित्य?
सवाल 3: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ *(मीडिया) की आवाज को दबाने और सरेआम धमकी देने वाले रसूखदारों पर कार्रवाई कब होगी?*
निष्कर्ष: सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। लेकिन यदि देश के उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में ही जनता और पत्रकार खुद को असुरक्षित महसूस करें, तो यह प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन क्या एक्शन लेता है।





