November 4, 2026 2:49 pm

ट्रेंडिंग स्टोरी
Advertisement

जंगलों के विनाश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: गारे पेलमा खदान मामले में नए सिरे से जनसुनवाई के निर्देश, खनन पर रोक नहीं

रायगढ़: रायगढ़ जिले में जंगलों और पर्यावरण की रक्षा के लिए चल रही कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी (महाजेंको) को गारे पेलमा सेक्टर-2 कोयला खदान परियोजना के मामले में बड़ा झटका देते हुए स्पष्ट किया है कि बिना नई जनसुनवाई के पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने कंपनी को राहत देते हुए यह भी साफ किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान क्षेत्र में मौजूदा खनन कार्य जारी रहेगा।

​सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ का अहम फैसला

​स्थानीय निवासी कन्हाई राम पटेल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 24 जुलाई को यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति देने से पहले कानून सम्मत नई जनसुनवाई कराना अनिवार्य है।

​अदालत ने इस पूरे मामले को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की भोपाल बेंच को वापस भेज दिया है और निर्देश दिया है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया तत्काल पूरी कर मामले का शीघ्र अंतिम निपटारा किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई आज, 3 अगस्त को होनी है, जिसमें दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखना है।

​क्या है पूरा मामला?

  • ​आवंटन और मंजूरी: महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी (महाजेंको) को रायगढ़ में गारे पेलमा सेक्टर-2 कोयला खदान आवंटित की गई है, जिसके तहत खनन कार्य शुरू किया गया है। कंपनी को 11 जुलाई 2022 को पर्यावरणीय मंजूरी मिली थी।
  • ​एनजीटी की आपत्ति: इस मंजूरी को स्थानीय स्तर पर चुनौती दी गई थी, जिस पर एनजीटी ने 15 जनवरी 2024 को पर्यावरण मंत्रालय को नए सिरे से जनसुनवाई कराने का निर्देश दिया था। एनजीटी ने माना था कि पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया में कानून के नियमों और उसकी भावना का पालन नहीं किया गया। साथ ही, परियोजना के जनस्वास्थ्य, जलविज्ञान और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का उचित मूल्यांकन भी नहीं किया गया था।

​तेजी से दोबारा मंजूरी और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: एनजीटी के आदेश के बावजूद, अगस्त 2024 में एक्सपर्ट एप्रेजल कमेटी (EAC) ने बिना नई जनसुनवाई के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर ही परियोजना को फिर से स्वीकृति दे दी। इसके बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू हो गई। इस मनमानी के खिलाफ स्थानीय निवासी कन्हाई राम पटेल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद यह नया फैसला सामने आया है।

News Spashat CG
Author: News Spashat CG

ताज़ा समाचार
Advertisement
Trending Story