जांजगीर/चापा
नगर पालिका परिषद चांपा क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां समाज सेविका डिंकी कौर के मजबूत प्रयासों और संघर्ष के बाद एक बेसहारा विधवा महिला को न्याय मिला है। स्वर्गीय हरदीप सिंह के मृत्यु प्रमाण पत्र में उनकी कानूनी पत्नी जसवीर कौर का नाम दर्ज न होने के कारण उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा था, जिसे डिंकी कौर ने अपनी मजबूत पैरवी से दूर कराया।
क्या था पूरा मामला
स्वर्गीय हरदीप सिंह के निधन के पश्चात उनके मृत्यु प्रमाण पत्र में उनकी पत्नी जसवीर कौर का नाम दर्ज नहीं किया गया था। इस सुधार के लिए जसवीर कौर ने नगर पालिका परिषद के कई चक्कर काटे, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सुनवाई न किए जाने से पीड़ित महिला हताश हो चुकी थी।
कलेक्टर जनदर्शन से लेकर एसडीएम कार्यालय तक लड़ा संघर्ष
जब इस पूरे मामले की जानकारी समाज सेविका डिंकी कौर को मिली, तो उन्होंने महिला का साथ देने का बीड़ा उठाया। डिंकी कौर ने सबसे पहले मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाने के लिए कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन दिलवाया। कलेक्टर द्वारा मामला एसडीएम के पास प्रेषित किए जाने के बाद, डिंकी कौर खुद पीड़ित जसवीर कौर को साथ लेकर एसडीएम के समक्ष उपस्थित हुईं और मजबूत पक्ष रखा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री की जनहितैषी टोल-फ्री सेवा 1076 के माध्यम से भी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई। लगातार दौड़-धूप और प्रशासनिक स्तर पर दबाव के बाद आखिरकार मृत्यु प्रमाण पत्र में जसवीर कौर का नाम दर्ज हो गया।
फर्जी एफिडेविट और साजिश की निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण में एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर किस परिस्थिति में और किन लोगों की मिलीभगत से वास्तविक पत्नी जसवीर कौर का नाम मृत्यु प्रमाण पत्र से गायब रखा गया था? इसके लिए जो शपथ पत्र (एफिडेविट) तैयार करवाया गया था, उसके पीछे किनका हाथ था, इसकी गहन छानबीन जरूरी है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी ने सोची-समझी साजिश के तहत या पद का दुरुपयोग करते हुए (विशेषकर किसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या अन्य संबंधित शासकीय/गैर-शासकीय व्यक्ति द्वारा) गलत जानकारी देकर फर्जी एफिडेविट तैयार करवाया था, तो ऐसे दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। एक विधवा महिला के कानूनी अधिकारों और गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
समाज सेवा की मिसाल
“असली समाज सेवा भाषणों से नहीं, बल्कि पीड़ित के आंसू पोछने और हक की लड़ाई में ढाल बनकर खड़े होने से होती है। डिंकी कौर ने इस मामले में साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और जनहित के लिए खड़े होने पर प्रशासन को भी झुकना पड़ता है और न्याय की जीत होती है।”




