रसूखदार विधायक के खिलाफ आर-पार की जंग: सीएम-राज्यपाल से गुहार, सरगुजा में अधिकारियों और कर्मचारियों ने खींची ‘विद्रोह’ की लकीर!
अंबिकापुर/सीतापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से कानून-व्यवस्था और लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सीतापुर विधानसभा से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा राजापुर के नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ दफ्तर के भीतर की गई बेरहमी से मारपीट, गाली-गलौज और अभद्रता के विरोध में पूरे जिले का राजस्व विभाग आक्रोशित हो उठा है।
ड्यूटी पर तैनात एक राजपत्रित अधिकारी की सुरक्षा और सम्मान को ताक पर रखकर किए गए इस हमले के खिलाफ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
सीएम और राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, लिपिक वर्ग भी आंदोलन में कूदा
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की सरगुजा इकाई ने सूबे के मुख्यमंत्री (सीएम) और महामहिम राज्यपाल के नाम एक सख्त ज्ञापन सौंपा है। इस आंदोलन को अब प्रशासनिक अमले के साथ-साथ बाबू वर्ग का भी पूरा साथ मिल गया है। विधायक की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर सरगुजा के सभी कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और लिपिक वर्ग के कर्मचारी सामूहिक रूप से ‘कलमबंद हड़ताल’ पर चले गए हैं, जिससे पूरे जिले में राजस्व का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।
नियमानुसार काम करने की मिली ‘सजा’, फटे कपड़े, एसडीएम ने बचाई जान
पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने जो आपबीती बताई है, वह बेहद विचलित करने वाली है और प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
क्या हुआ था उस दिन?
“बुधवार को विधायक की चचेरी बहन ‘शोध क्षमता प्रमाण पत्र’ (सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट) बनवाने आई थीं। दस्तावेज अधूरे होने के कारण मैंने नियमानुसार उन्हें अगले दिन जरूरी कागजात लाकर विधिवत जांच कराने को कहा। बस इतनी सी बात पर, विधायक के रसूख और सत्ता के नशे में चूर होकर उनके समर्थकों ने मुझे राजापुर बुलाया। वहां विधायक रामकुमार टोप्पो की मौजूदगी में 15-20 गुंडों ने मुझे घेर लिया। मेरे साथ भद्दी गालियां देते हुए मारपीट की गई, मेरे कपड़े फाड़ दिए गए और जान से मारने की धमकी दी गई। अगर मौके पर मौजूद सीतापुर एसडीएम फागेश सिन्हा बीच-बचाव नहीं करते, तो मेरी जान भी जा सकती थी।”
— तुषार मानिकपुरी, पीड़ित नायब तहसीलदार
एफआईआर दर्ज, पर सत्ता के संरक्षण में गिरफ्तारी से बच रहे विधायक!
प्रशासनिक दबाव के बाद पुलिस ने विधायक रामकुमार टोप्पो, उनके करीबियों—यूसुफ, नाजिम राजा, पंकज गुप्ता और अन्य समर्थकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसमें लोक सेवक को बंधक बनाने, सरकारी काम में बाधा डालने और दंगा भड़काने जैसी धाराएं शामिल हैं।
राजस्व संघ का आरोप है कि विधायक के खिलाफ स्पष्ट सबूत और एफआईआर होने के बावजूद पुलिस सत्ता पक्ष के दबाव में आकर उनकी गिरफ्तारी से कतरा रही है। उल्टा, अधिकारी का मनोबल तोड़ने के लिए विधायक पक्ष द्वारा बाद में एक झूठी ‘क्रॉस एफआईआर’ लिखवाई गई है, जो पूरी तरह से मनगढ़ंत और जांच को भटकाने की साजिश है।
”जब अधिकारी ही सुरक्षित नहीं, तो जनता कैसे सुरक्षित रहेगी?”
इस कायराना हमले के विरोध में कनिष्ठ सेवा संघ और लिपिक संघ ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जब तक विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके गुंडों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं होगा और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी कलम उठाएगा।
- कामकाज पूरी तरह ठप: जिले की सभी तहसीलों और उप-तहसीलों में ताले लटक गए हैं। पटवारी, आरआई, तहसीलदार और लिपिकों ने साफ कर दिया है कि वे ऐसे भयभीत माहौल में काम नहीं कर सकते।
- अधिकारियों की मांग: मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि शासकीय सेवकों को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए और जनप्रतिनिधियों की इस दबंगई पर कड़ा एक्शन लेते हुए विधायक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों और कर्मचारियों का साफ कहना है कि अगर एक ईमानदार और नियम से काम करने वाले अधिकारी को इस तरह सरेआम प्रताड़ित किया जाएगा, तो कोई भी शासकीय कर्मचारी निष्पक्ष होकर अपनी ड्यूटी नहीं निभा पाएगा। अब देखना यह है कि राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पर क्या निर्देश आते हैं और प्रशासन राजनीतिक रसूख के आगे झुकता है या अपने अधिकारी को न्याय दिलाता है।





