4 जून 2026
शराब दुकानों की सुरक्षा में तैनात जिन सुरक्षा गार्डों के कंधों पर सरकारी राजस्व और व्यवस्था को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है, आज वे खुद को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। रायगढ़ जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी ठेके पर काम करने वाली सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला वर्दी और नौकरी की ‘सौदागरी’ से जुड़ा है, जिसकी लिखित शिकायत अब जिला आबकारी विभाग के दफ्तर तक पहुंच चुकी है।
क्या है पूरा मामला? (क्रोनोलॉजी समझिए)
- मांग: रायगढ़ जिले की सरकारी शराब दुकानों में तैनात सुरक्षा गार्डों का आरोप है कि प्लेसमेंट/सुरक्षा एजेंसी के अधिकारी उनसे वर्दी (यूनिफॉर्म) देने के बदले मोटी रकम वसूल रहे हैं।
- धमकी: आरोप है कि जो कर्मचारी पैसे देने में असमर्थता जता रहे हैं, उन्हें सीधे नौकरी से निकालने या दूरदराज के क्षेत्रों में ट्रांसफर करने की धमकी दी जा रही है।
- नई भर्तियों में खेल: शिकायत पत्र के अनुसार, एजेंसी में नए लोगों को रखने और मनचाही पोस्टिंग देने के लिए भी बकायदा ‘रेट कार्ड’ तय कर अवैध वसूली की जा रही है।
सीमित मानदेय पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’
पीड़ित सुरक्षा गार्डों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हमारा मासिक वेतन बेहद सीमित है। महंगाई के इस दौर में जैसे-तैसे परिवार का गुजारा होता है। ऐसे में एजेंसी के अधिकारियों द्वारा हजारों रुपये की अवैध मांग हमारे पेट पर लात मारने जैसी है।” गार्डों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष और डर का माहौल है।
सोशल मीडिया पर ‘ऑडियो बम’ से मचा हड़कंप
इस पूरे विवाद को हवा तब और मिल गई, जब सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल हो गई। इस ऑडियो में कुछ लोग कथित तौर पर नई भर्ती और विभागीय प्रक्रियाओं को सेटल करने के नाम पर पैसों के लेन-देन की बात कर रहे हैं। हालांकि, इस वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इसने आबकारी महकमे में हड़कंप जरूर मचा दिया है।
आबकारी विभाग का एक्शन: एजेंसी को नोटिस जारी
शिकायत और सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बाद जिला आबकारी विभाग बैकफुट पर आने के मूड में नहीं है। विभाग के आला अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित सुरक्षा एजेंसी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।
अधिकारियों का पक्ष:
“सुरक्षा गार्डों की शिकायत हमें मिली है। वायरल ऑडियो और लिखित आरोपों की जांच के लिए एक टीम गठित की जा रही है। सभी तथ्यों और बयानों का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा। यदि सुरक्षा एजेंसी या उसका कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
कर्मचारियों की दो टूक: ‘काम की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच हो’
सुरक्षा कर्मियों ने साफ कर दिया है कि वे इस लड़ाई को पीछे नहीं खींचेंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
- पूरी जांच निष्पक्ष हो और किसी बाहरी प्रभाव से मुक्त हो।
- शिकायत करने वाले किसी भी गार्ड को नौकरी से न निकाला जाए (ह्विसलब्लोअर प्रोटेक्शन)।
- वर्दी और अन्य बुनियादी सुविधाएं नियमानुसार मुफ्त या निर्धारित शुल्क पर ही दी जाएं।
बड़ा सवाल: सरकारी ठेकों पर काम करने वाली बाहरी एजेंसियों द्वारा स्थानीय कर्मचारियों का शोषण छत्तीसगढ़ में नया नहीं है। अब देखना यह होगा कि रायगढ़ प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करता है, ताकि इन गरीब सुरक्षाकर्मियों को न्याय मिल सके।





