“विकास की बलि: नियमों को दरकिनार कर घने जंगलों को चीरती लौह अयस्क की राह, बैकफुट पर वन विभाग।”
अंतागढ़: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग स्थित अंतागढ़ से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ लौह अयस्क का खनन करने वाली एक कंपनी पर बिना विधिवत अनुमति के घने जंगलों की कटाई करने और अवैध रूप से सड़क बनाकर खनिजों की ढुलाई शुरू करने का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, संबंधित कंपनी ने किसी भी पर्यावरणीय मंजूरी या वन विभाग की अनुमति के बिना संरक्षित वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की। खनन सामग्री की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए जंगल के बीचों-बीच सड़क का निर्माण कर लिया गया और बिना किसी बाधा के लौह अयस्क की ढुलाई शुरू कर दी गई।
इस अवैध गतिविधि की जानकारी मिलते ही स्थानीय वन विभाग ने कंपनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू की।
अफवाहों का बाजार गर्म
वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के बाद से इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें जोर पकड़ रही हैं। क्षेत्र में यह अफवाह फैलाई गई है कि जिस कंपनी के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई की है, उसमें देश के एक बड़े राजनेता के बेटे का निवेश है। राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को प्रशासनिक अमले को दबाव में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आर्थिक समीकरण और असंतोष
इस सड़क निर्माण से कंपनी (KCCL) को काफी फायदा हुआ है, जिससे उनका ट्रांसपोर्टेशन खर्च आधा हो गया है। हालांकि, इस व्यवस्था के कारण पहले से काम कर रहे ट्रांसपोर्टेशन ठेकेदारों में गहरा असंतोष है। उनका कहना है कि कंपनी की मनमानी से उनके रोजगार और मुनाफे पर सीधा असर पड़ा है।
अधिकारी के तबादले की सुगबुगाहट
बस्तर की कार्यप्रणाली और छत्तीसगढ़ सरकार के तौर-तरीकों को करीब से जानने वाले जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम का अंत वन विभाग के उस अधिकारी के लिए सुखद नहीं होगा जिसने कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई है। राजनीतिक दबाव और कंपनी के रसूख को देखते हुए स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि उक्त वन अधिकारी का जल्द ही तबादला किया जा सकता है।
फिलहाल, वन विभाग की इस कार्रवाई और आने वाले दिनों में प्रशासनिक फेरबदल की संभावनाओं ने बस्तर के प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।





