कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली राजनीतिक और प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। अंतागढ़ ब्लॉक में विकास कार्य ठप होने से नाराज 56 सरपंचों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा देकर सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों के इस्तीफे से प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
मामला क्या है? क्यों फूटा सरपंचों का गुस्सा?
सरपंचों का सीधा आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने पिछले कई महीनों से ग्राम पंचायतों का बजट रोक रखा है। ‘नो फंड, नो वर्क’ की स्थिति के कारण गांवों में बुनियादी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं।
ठप पड़े काम: सड़क, नाली निर्माण, साफ पानी की व्यवस्था और सामुदायिक भवनों जैसे बुनियादी काम पूरी तरह रुक गए हैं।
अधूरी योजनाएं: कई सरकारी योजनाएं जिन्हें मंजूरी मिल चुकी थी, वे बजट के अभाव में कागजों से बाहर नहीं आ पा रही हैं।
”जनता मांगती है जवाब, हम क्या कहें?” — सरपंचों का दर्द
सामूहिक इस्तीफा देने वाले सरपंचों ने अपनी विवशता जाहिर करते हुए कहा:
”गांव के लोग हर दिन हमसे सवाल करते हैं कि विकास कार्य कब शुरू होंगे? जब प्रशासन हमें फूटी कौड़ी नहीं दे रहा, तो हम ग्रामीणों को क्या मुंह दिखाएं? जनता की नाराजगी झेलने से बेहतर है कि हम पद ही छोड़ दें।”
सरपंचों का कहना है कि वे बिना संसाधनों के सिर्फ नाम के मुखिया बनकर नहीं रहना चाहते।
बैकफुट पर प्रशासन, डैमेज कंट्रोल की तैयारी
इस ‘विस्फोटक’ सामूहिक इस्तीफे के बाद जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। आला अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है।
अब आगे क्या?
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन जल्द ही बागी सरपंचों के साथ एक आपात बैठक (संवाद) करने जा रहा है। बजट आवंटन में आ रही तकनीकी और कागजी अड़चनों को दूर करने का आश्वासन देकर सरपंचों को मनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि गांवों में ठप पड़ी व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन के खोखले आश्वासनों से सरपंच मानते हैं या बजट जारी होने के बाद ही बात बनेगी





