रायगढ़। रायगढ़ जिले के टिमरलगा और गुड़ेली क्षेत्र में क्रशर संचालकों की मनमानी चरम पर है। बिना किसी खनन लीज के सर्वमंगला क्रशर परिसर में चूनापत्थर का विशाल पहाड़ खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्रशर के पास खनन का अधिकार नहीं है, तो लाखों टन पत्थर का स्रोत क्या है?
मिली जानकारी के अनुसार, मुकेश मित्तल द्वारा संचालित सर्वमंगला क्रशर को केवल भंडारण लाइसेंस (10 अगस्त 2021 से 9 अगस्त 2031 तक) प्राप्त है। नियमों के अनुसार, इन्हें केवल अधिकृत खदानों से रॉयल्टी पर्ची (TP) के साथ पत्थर लाना अनिवार्य है। बावजूद इसके, परिसर में बिना किसी बिल या वैध दस्तावेजों के लाखों टन खनिज जमा है। सूत्रों का आरोप है कि यह सारा पत्थर अवैध खदानों से लाया गया है, जिससे न केवल सरकार को करोड़ों की रॉयल्टी का चूना लग रहा है, बल्कि लात नाला के किनारे और शासकीय जमीनों पर बड़े पैमाने पर पर्यावरण को भी नष्ट किया जा रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही पर केंद्रित
खनिज विभाग की नाक के नीचे चल रहा अवैध खेल, क्रशर संचालकों की मिलीभगत से पर्यावरण को भारी नुकसान
रायगढ़। टिमरलगा और गुड़ेली क्षेत्र में चल रहे क्रशरों के अवैध कारोबार से शासन को लाखों का नुकसान हो रहा है। यहां के क्रशर संचालक वैध खदानों के बजाय अवैध खनन से बोल्डर जुटाकर अपने स्टॉक में दिखा रहे हैं। सर्वमंगला क्रशर इसका एक बड़ा उदाहरण है, जहां भंडारण लाइसेंस की आड़ में बिना किसी टीपी (ट्रांसपोर्ट परमिट) के अवैध खनिजों का अंबार लगा दिया गया है।
अधिकारियों की ‘वसूली’ पर मौन?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन और भंडारण की जानकारी सरपंच से लेकर पटवारी और आरआई तक सभी को है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। आरोप है कि विभागीय अधिकारी समय-समय पर इन अवैध स्थलों पर पहुंचते तो हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय ‘वसूली’ करके वापस लौट जाते हैं। हाल ही में एक महिला अधिकारी द्वारा लाखों की डील करने की चर्चा भी क्षेत्र में जोरों पर रही, जिसके बाद अवैध उत्खनन आज भी पूर्ववत जारी है। स्थानीय प्रशासन की इस चुप्पी ने न केवल पर्यावरण को खतरे में डाल दिया है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी बड़ी चपत लगाई है।





