बांकीमोंगरा (कोरबा):
कहते हैं जल ही जीवन है, लेकिन बांकीमोंगरा के कटाईनार वार्ड क्रमांक 14 में जल अब ‘सियासत और भ्रष्टाचार’ का जरिया बन चुका है। यहां प्यासी जनता को पानी तो नहीं मिला, लेकिन पानी के नाम पर सरकारी खजाने को कैसे चूना लगाया जाता है, इसका एक जीता-जागता नमूना जरूर सामने आ गया है।
इस पूरे खेल का पर्दाफाश करते हुए भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ की जिला सोशल मीडिया प्रभारी डिंकी कौर ने सीधे जिला प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
खेल नंबर 1: पहले मशीन फेल, फिर हाथ बोर फेल… अब ‘तीसरी’ तैयारी!
वार्ड 14 में पेयजल संकट दूर करने के लिए कुछ समय पहले एक बोरिंग का काम शुरू हुआ था। बड़े तामझाम के साथ मशीन बुलाई गई, गहरा गड्ढा खोदा गया और दावा किया गया कि अब वार्डवासियों की प्यास बुझेगी। लेकिन यह दावा महज दो दिन में हवा हो गया।
- पहला प्रयास: भारी-भरकम मशीन से खुदाई हुई, जो पूरी तरह असफल (फेल) रही।
- दूसरा प्रयास: मशीन फेल हुई तो आनन-फानन में ‘हैंड बोर’ (हाथ से खुदाई) का सहारा लिया गया। नतीजा फिर वही—ढाक के तीन पात!
- अब क्या हो रहा है?: दो-दो बार सरकारी राशि को पानी में बहाने के बाद, अब उसी नाकाम स्पॉट से चंद कदम की दूरी पर तीसरे बोर की तैयारी चल रही है।
सवाल यह उठता है कि: क्या बोरिंग से पहले कोई तकनीकी सर्वे या हाइड्रोलॉजिकल जांच नहीं की गई थी? अगर की गई थी, तो बार-बार जनता का पैसा क्यों बर्बाद किया जा रहा है? डिंकी कौर का सीधा आरोप है कि जहां पानी की जरूरत है, वहां काम न कराकर चुनिंदा जगहों पर पक्षपात किया जा रहा है।
खेल नंबर 2: ‘जनदर्शन’ की साख पर बट्टा, पावती तो मिली पर कार्रवाई कब?
जब जनता की सुनवाई स्थानीय स्तर पर नहीं हुई, तो समाजसेविका डिंकी कौर ने सीधे जिले के मुखिया (कलेक्टर) का दरवाजा खटखटाया। दिनांक 04/05/2026 को कलेक्टर जनदर्शन में बाकायदा लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिसका सुरक्षा क्रमांक 2050126001539 है (जैसा कि दस्तावेज 1002810963.jpg में साफ देखा जा सकता है)।
हैरानी की बात यह है कि जनदर्शन के इस टोकन और आवेदन को गुजरे अच्छा-खासा वक्त हो गया है, लेकिन प्रशासनिक अमला अब तक गहरी नींद में है। जनता पूछ रही है कि क्या ‘जनदर्शन’ सिर्फ आवेदन जमा करने का एक औपचारिकता मात्र केंद्र बनकर रह गया है?
खेल नंबर 3: भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया, तो मिली ‘बंद कमरे में धमकी’
दस्तावेज 1002810963.jpg और 1002810964.jpg में जो सबसे चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा हुआ है, वह है शिकायतकर्ता को डराने-धमकाने का। डिंकी कौर ने खुलेआम आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस बोरिंग घोटाले के खिलाफ आवाज उठाई, तो वार्ड पार्षद के पति और कुछ रसूखदारों ने उन्हें ‘शाम की एक मीटिंग’ में बुलाया।
वहां बंद कमरे के भीतर एक महिला जनप्रतिनिधि के साथ न केवल अपमानजनक व्यवहार किया गया, बल्कि उन पर बयान बदलने और शिकायत वापस लेने का मानसिक दबाव बनाया गया। बात यहीं नहीं रुकी, शिकायत वापस न लेने पर बांकीमोंगरा थाने में झूठी एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की सीधी धमकी तक दे डाली गई। डिंकी कौर ने अत्यंत भावुक और आक्रोशित शब्दों में कलेक्टर से कहा है कि एक महिला होने के नाते वह और उनकी छोटी बच्ची अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
दिल्ली और रायपुर तक गूंजेगी बांकीमोंगरा की गूंज
प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी से नाराज डिंकी कौर ने अब सीधे ‘दिल्ली और रायपुर’ के दरबार का रुख करने का मन बना लिया है। 13/05/2026 को जारी पत्र (1002810964.jpg) के अनुसार, उन्होंने इस पूरे मामले की प्रतिलिपि (कॉपी) सीधे:
- माननीय नगरीय प्रशासन मंत्री (छत्तीसगढ़ शासन)
- प्रदेश अध्यक्ष, सहकारिता प्रकोष्ठ (भाजपा, छत्तीसगढ़)
- जिला अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी (कोरबा) और सबसे महत्वपूर्ण, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नई दिल्ली को भेजने की तैयारी पूरी कर ली है।
निष्कर्ष: अब साख दांव पर है!
यह मामला अब सिर्फ दो फेल हो चुके बोरिंग का नहीं है, यह मामला एक महिला की सुरक्षा, सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासन की ईमानदारी का है। देखना होगा कि कोरबा जिला प्रशासन इस ‘बोरिंग खेल’ के संरक्षकों पर कार्रवाई करता है या फिर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के डंडे का इंतजार करता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट पूरी तरह से शिकायतकर्ता डिंकी कौर द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए दस्तावेजों (साक्ष्य: 1002810963.jpg व 1002810964.jpg) और उनके आरोपों पर आधारित है। निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों के तहत, संबंधित वार्ड पार्षद, नगरपालिका प्रशासन या आरोपी पक्ष का बयान आने पर उसे भी स्थान दिया जाएगा।




