June 13, 2026 7:12 pm

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पत्रकार सुरक्षा कानून के उल्लंघन का आरोप, आईजी और कलेक्टर ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा

  • पत्रकारों पर FIR के विरोध में उतरा मीडिया जगत, 15 जून से आर-पार की जंग!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पत्रकार जिया खान और अनुज श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को लेकर मीडिया जगत में भारी आक्रोश है। जिले के पत्रकारों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और बिलासपुर रेंज के आईजी (IG) के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। पत्रकारों का सीधा आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत और तय नियमों का पालन किए, एकतरफा कार्रवाई करते हुए यह एफआईआर दर्ज की है।

पत्रकार समुदाय ने प्रशासन को चेताया है कि यदि 3 दिनों के भीतर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो 15 जून 2026 से पूरे जिले में चरणबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला? (विवाद की जड़)

वायरल वीडियो: कुछ दिनों पहले सिविल लाइन थाने के पुराने भवन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक पुलिस आरक्षक वर्दी में सोता हुआ दिख रहा था और कमरे में शराब व बीयर की बोतलें रखी थीं। कई न्यूज़ पोर्टलों ने इस खबर को पुलिस के पक्ष के साथ प्रमुखता से दिखाया था।

कथित ऑडियो और FIR: इसके बाद आरक्षक मनोज साहू और एक चाय दुकान संचालक के बीच बातचीत का एक ऑडियो सामने आया। इस ऑडियो के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि पत्रकारों ने वीडियो न दिखाने के बदले पैसों की मांग की थी। इसी को आधार बनाकर सिविल लाइन पुलिस ने जिया खान और अनुज श्रीवास्तव सहित चार लोगों पर मामला दर्ज कर लिया।

पत्रकारों के गंभीर आरोप: ‘नियम ताक पर रखे, नहीं मिला कोई सबूत’

सौपे गए ज्ञापन में पत्रकारों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

एकतरफा कार्रवाई: एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपी बनाए गए पत्रकारों का पक्ष तक नहीं जाना गया और न ही किसी स्वतंत्र गवाह से जांच कराई गई।

सबूतों का अभाव: पत्रकारों का दावा है कि किसी भी पत्रकार के खिलाफ सीधे तौर पर लेन-देन या ब्लैकमेलिंग का कोई ऑडियो या वीडियो सबूत मौजूद नहीं है।

पत्रकार सुरक्षा कानून का उल्लंघन: शासन और पुलिस मुख्यालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि पत्रकारों से जुड़े मामलों में सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती। वर्ष 2023 में लागू पत्रकार सुरक्षा कानून के तहत ऐसी शिकायतों की जांच के लिए एक विशेष समिति (जिसमें पुलिस, जनसंपर्क विभाग और वरिष्ठ पत्रकार शामिल हों) का गठन होना अनिवार्य है। पुलिस ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया।

पत्रकारों की प्रमुख मांगें

जिया खान और अनुज श्रीवास्तव के मामले को तुरंत सक्षम समिति को सौंपकर 3 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

बिलासपुर जिले में ‘पत्रकार सुरक्षा समिति’ की वर्तमान स्थिति और उसके काम करने के तरीकों को उजागर किया जाए।

भविष्य में किसी भी पत्रकार के खिलाफ शिकायत मिलने पर पहले समिति से जांच हो, और आरोप साबित होने पर ही एफआईआर दर्ज की जाए।

हम किसी अपराधी का समर्थन नहीं कर रहे”

पत्रकार संघ ने साफ किया है कि वे किसी भी गलत या दोषी व्यक्ति को संरक्षण देने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन पुलिस की कार्रवाई कानून और तय प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए, न कि किसी दुर्भावना या दबाव में।

प्रशासनिक हलचल: आईजी और कलेक्टर ने संभाला मोर्चा

ज्ञापन सौंपने के दौरान बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग और कलेक्ट्रेट संजय अग्रवाल ने पत्रकारों की शिकायतों को बेहद गंभीरता से सुना। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ शासन के वर्ष 2023 के पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रावधानों का भी अवलोकन किया।

अधिकारियों ने पत्रकारों को आश्वस्त करते हुए कहा:

“किसी भी पत्रकार के साथ गलत या अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। पूरे मामले की निष्पक्षता से बारीकी के साथ जांच कराई जाएगी।”

अब देखना यह होगा कि प्रशासन के इस आश्वासन के बाद क्या 3 दिनों के भीतर पुलिस अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करती है, या फिर 15 जून से बिलासपुर की सड़कों पर पत्रकारों का बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा।

News Spashat CG
Author: News Spashat CG

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