“सड़क नहीं तो हेलीकॉप्टर सही” –
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में आयोजित ‘सुशासन तिहार शिविर’ में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब एक ग्रामीण ने प्रशासन से सड़क की जगह सीधे हेलीकॉप्टर की मांग कर दी। पहली नजर में यह आवेदन भले ही एक मजाक या चर्चा का विषय लगे, लेकिन इसके पीछे व्यवस्था के प्रति ग्रामीणों की वर्षों पुरानी नाराजगी और गहरी निराशा छिपी हुई है।
यह पूरा मामला गाड़ाडीह गांव का है, जहां के रहने वाले राजकुमार ने यह अनोखा आवेदन दिया है।
राजकुमार का कहना है कि वे अपने गांव की जर्जर सड़क को बनवाने के लिए सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आवेदन देते-देते उनकी चप्पलें घिस गईं, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूटी। ऐसे में तंग आकर उन्होंने इस बार सीधे हेलीकॉप्टर की मांग कर डाली, जो वास्तव में व्यवस्था पर एक करारा व्यंग्य है।
बरसात में बंधक बन जाता है गांव

ग्रामीणों के मुताबिक, यह जर्जर रास्ता गांव के बच्चों के स्कूल जाने का मुख्य मार्ग है। बरसात के दिनों में सड़क की स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। कीचड़ और जलभराव के कारण ग्रामीणों को रोजाना नरकीय जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ता है।
विधायक और अधिकारियों के सामने गूंजा मामला
दिलचस्प बात यह है कि यह आवेदन उस समय सौंपा गया, जब शिविर में स्थानीय विधायक ईश्वर साहू और तमाम आला प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। देखते ही देखते हेलीकॉप्टर की मांग वाला यह आवेदन पूरे शिविर में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गया।
यह आवेदन सरकारी योजनाओं और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सवाल यह है कि आखिर एक आम नागरिक को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा पाने के लिए इस तरह की असामान्य मांग का सहारा क्यों लेना पड़ा? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आवेदन के पीछे छिपी ग्रामीणों की पीड़ा को समझकर सड़क निर्माण कराता है, या फिर इस मांग पर सिर्फ मुस्कुराकर आगे बढ़ जाता है
🚨 बेमेतरा: “सड़क नहीं दे सकते, तो हेलीकॉप्टर ही दे दो साहेब!” – सरकारी सिस्टम से परेशान ग्रामीण का अनोखा विरोध
📍 कहाँ का है मामला?
बेमेतरा जिले के ‘सुशासन तिहार’ समाधान शिविर का, जहां स्थानीय विधायक ईश्वर साहू और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।
🛸 क्या है पूरा माजरा?
गाड़ाडीह गांव के निवासी राजकुमार ने प्रशासन को एक आवेदन दिया है, जिसमें उन्होंने अपने लिए ‘हेलीकॉप्टर’ की मांग की है।
💬 क्यों करनी पड़ी ऐसी मांग?
राजकुमार का कहना है कि वे गांव की बदहाल सड़क को ठीक कराने के लिए सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आवेदन देते-देते चप्पलें घिस गईं, लेकिन सड़क नहीं बनी। बरसात में पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है और बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए थक-हारकर उन्होंने व्यंग्य के रूप में हेलीकॉप्टर मांग लिया।
🤔 बड़ा सवाल:
क्या अब ग्रामीणों को सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी ऐसे ही ‘असामान्य’ आवेदन देने होंगे? देखना होगा कि प्रशासन इस छिपे हुए दर्द को समझता है या फाइल बंद कर देता है।





