लैलूंगा: विकासखंड लैलूंगा के मिडिल स्कूल पोतरा में शनिवार को 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अत्यंत उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया। “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों, शिक्षकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

सुबह 6:30 बजे शुरू हुए सत्र में योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, कपालभाति के साथ-साथ ताड़ासन, वृक्षासन और भुजंगासन का अभ्यास कराया गया। प्रधानाध्यापक ने योग को जीवन जीने की वैज्ञानिक पद्धति बताते हुए इसे दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और ‘स्वस्थ भारत, सक्षम भारत’ के नारों के साथ हुआ। ग्रामीणों ने इस आयोजन को स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए एक सराहनीय कदम बताया।
योगमय हुआ पोतरा! 🧘♂️ मिडिल स्कूल में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने किया योग
आज 21 जून, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मिडिल स्कूल पोतरा में एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। स्कूल के नन्हे-मुन्नों के साथ गाँव के जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी योग करने के लिए एक साथ आए।
✅ क्या रहा खास?
- थीम: एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग।
- अभ्यास: प्राणायाम, अनुलोम-विलोम से लेकर ताड़ासन और शवासन तक का सफल अभ्यास।
- उद्देश्य: भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव मुक्त जीवन और बेहतर स्वास्थ्य।
शिक्षकों ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा— “योग केवल एक दिन का काम नहीं, यह जीवन का आधार है।” स्कूल परिसर आज “योग से निरोग” के नारों से गूंज उठा।
पोतरा की नई पहल: जब स्कूली बच्चों के साथ योग की चटाई पर बैठे गाँव के बुजुर्ग
योग का उद्देश्य एकता है, और आज मिडिल स्कूल पोतरा ने इसे चरितार्थ कर दिखाया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर जब स्कूल परिसर में योग की कक्षा शुरू हुई, तो वहाँ सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि गाँव के सम्मानित जनप्रतिनिधि और आम ग्रामीण भी शामिल थे।
एक घंटे तक चले इस सत्र में पीढ़ी का फासला मिट गया। जहाँ बच्चे ताड़ासन कर अपनी लंबाई और एकाग्रता बढ़ाने का संकल्प ले रहे थे, वहीं बुजुर्ग अपनी शारीरिक चुस्ती के लिए अनुलोम-विलोम कर रहे थे। प्रधानाध्यापक ने स्पष्ट किया कि योग का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सुधारना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ समाज की नींव रखना है।
ग्रामीणों ने कहा, “हमने पहली बार इतने सामूहिक स्तर पर योग किया है, अब इसे अपनी आदत बनाएंगे।” पोतरा गाँव का यह प्रयास न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैला रहा है, बल्कि समाज में एकजुटता का संदेश भी दे रहा है।





