June 10, 2026 5:28 am

ट्रेंडिंग स्टोरी
Advertisement

​भाजयुमो पदाधिकारी की गिरफ्तारी से गरमाई रायगढ़ की राजनीति, उठ रहे संगठन की साख पर सवाल

रायगढ़। रायगढ़ पुलिस के विशेष अभियान “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। चर्चित मारपीट और एट्रोसिटी (जातिसूचक अपमान) मामले में लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी तरणजीत सिंह भाठिया और उसके साथी बबलू दास महंत को पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है। न्यायालय में पेशी के बाद दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
​इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद अब रायगढ़ का राजनीतिक पारा चढ़ गया है और गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
​क्या है पूरा मामला?
​पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद चक्रधरनगर थाना क्षेत्र का है।
​घटनास्थल: विजयम उत्सव मैरिज गार्डन के पास।
​आरोप: दोनों आरोपियों पर एक युवक के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उसे जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित करने का आरोप है।
​पुलिसिया कार्रवाई: शिकायत के बाद चक्रधरनगर थाना में आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (Atrocity Act) के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी घटना के बाद से ही फरार चल रहे थे, जिन्हें पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत धरदबोचा।
​गिरफ्तारी के बाद क्यों गरमाई राजनीति?
​इस मामले ने कानूनी मोड़ के साथ-साथ तीव्र राजनीतिक रंग भी अख्तियार कर लिया है। इसकी मुख्य वजह मुख्य आरोपी तरणजीत सिंह भाठिया की राजनीतिक पृष्ठभूमि है। तरणजीत सिंह भाठिया वर्तमान में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) रायगढ़ जिला कार्यकारिणी में जिला उपाध्यक्ष के पद पर काबिज है।
​सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: गिरफ्तारी के तुरंत बाद भाजयुमो की जिला कार्यकारिणी सूची की प्रतियां सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। इसके बाद आम जनता और राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इतने गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त पदाधिकारियों को संगठनात्मक पदों पर बने रहने का हक है?
​संगठन की साख पर उठे सवाल
​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले व्यक्तियों से समाज हमेशा उच्च नैतिक आचरण की अपेक्षा करता है।
​छवि पर दाग: विश्लेषकों के अनुसार, जब किसी प्रमुख पदाधिकारी पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होता है, तो उसका असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इससे सीधे तौर पर जुड़े संगठन की साख और सार्वजनिक विश्वसनीयता धूमिल होती है।
​नीति की मांग: सामाजिक और राजनीतिक हलकों में यह मांग भी तेज हो गई है कि राजनीतिक दलों को ऐसे गंभीर मामलों (विशेषकर एट्रोसिटी और मारपीट) में लिप्त कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों के खिलाफ एक स्पष्ट और पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए, ताकि जनता के बीच गलत संदेश न जाए।
​संगठन के फैसले पर टिकीं सबकी नजरें
​हालांकि, कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी मामले में अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा ही तय किया जाएगा। लेकिन वर्तमान में पूरी सुगबुगाहट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भाजयुमो संगठन के रुख को लेकर है।
​फिलहाल चुप्पी: इस संवेदनशील मामले और गिरफ्तारी को लेकर भारतीय जनता पार्टी या भाजयुमो संगठन की ओर से अब तक कोई भी आधिकारिक बयान या संगठनात्मक कार्रवाई (जैसे निलंबन या पदमुक्ति) सामने नहीं आई है।
​अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा संगठन अपनी साख बचाने के लिए इस मामले में कोई कड़ा फैसला लेता है, या फिर न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार करता है। फिलहाल, पुलिस की इस कार्रवाई ने शहर के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है।

News Spashat CG
Author: News Spashat CG

ताज़ा समाचार
Advertisement
Trending Story