घरघोड़ा/रायगढ़: ग्रामीण व्यवस्था की धुरी माने जाने वाले कोटवार अब अपनी उपेक्षा से आहत होकर आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को कोटवार एसोसिएशन (तहसील इकाई घरघोड़ा) ने अपनी लंबित मांगों की अनदेखी के विरोध में एक जुट होकर एसडीएम कार्यालय का रुख किया।
एसडीएम को सौंपा मांगपत्र
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने घरघोड़ा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) दुर्गा प्रसाद अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रशासनिक उपस्थिति दर्ज कराते हुए तहसीलदार मनोज गुप्ता और थाना प्रभारी कुमार गौरव साहू भी मौजूद रहे। ज्ञापन में कोटवारों ने स्पष्ट किया कि अब वे कोरे आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।
जिम्मेदारियां अनगिनत, लेकिन मानदेय नगण्य

ज्ञापन के माध्यम से कोटवारों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि, “हम गांव में प्रशासन की आंख और कान बनकर हर वक्त मुस्तैद रहते हैं। राजस्व कार्यों से लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक और गांव में सरकारी मुनादी से लेकर आपदा प्रबंधन तक की जिम्मेदारी हम पूरी निष्ठा से निभाते हैं। बावजूद इसके, आज भी हम उचित वेतन और सुरक्षित भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”
प्रमुख मांगों पर सरकार का रुख स्पष्ट करने की मांग
कोटवारों ने अपनी मुख्य मांगों को दोहराते हुए कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर तुरंत रुख स्पष्ट करना चाहिए:
- नियमितीकरण की नीति: लंबे समय से लंबित नियमितीकरण की प्रक्रिया को तत्काल शुरू किया जाए।
- सम्मानजनक वेतनमान: महंगाई के दौर में वर्तमान वेतन में गुजारा संभव नहीं है, इसे संशोधित किया जाए।
- सेवा और सामाजिक सुरक्षा: कोटवारों को भविष्य की चिंता से मुक्त करने के लिए उचित सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू हों।
आगे की रणनीति का संकेत
संघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो आने वाले समय में कोटवार उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। सरकार के स्तर पर ठोस निर्णय न लिए जाने से पूरे प्रदेश के कोटवारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।





