August 5, 2026 6:28 am

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एक पत्थर को बनाया आधार, ईश्वर में लीन हो गए बाबा सत्यनारायण: 42वें जन्मोत्सव पर देखिए एक तपस्वी का सफर।”

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के आस्था केंद्र कोसमनारा स्थित ‘बाबा सत्यनारायण धाम’ आज भक्ति के रंग में सराबोर है। हठयोगी बाबा सत्यनारायण के 42वें जन्मोत्सव के अवसर पर आज सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। 13 वर्ष की अल्पायु में सांसारिक मोह त्यागकर शिव साधना में लीन होने वाले बाबा आज लाखों भक्तों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

​वर्ष 1998 में शुरू हुई उनकी यह कठोर तपस्या आज भी अनवरत जारी है। चाहे भीषण गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, बाबा एक ही स्थान पर अपनी साधना में अडिग हैं। कामाख्या के संतों द्वारा ‘श्री श्री 1008’ की उपाधि से नवाजे गए बाबा सत्यनारायण का सानिध्य पाकर भक्त स्वयं को धन्य मान रहे हैं। आज के पावन दिन पर धाम में विशेष पूजा-अर्चना और भजनों का आयोजन किया गया है, जहाँ दूर-दराज से आए श्रद्धालु बाबा की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं।

 विज्ञान का चमत्कार? 42वें जन्मदिन पर चर्चा में हठयोगी बाबा सत्यनारायण की जीवनशैली

रायगढ़: रायगढ़ के कोसमनारा में रहने वाले हठयोगी बाबा सत्यनारायण का आज 42वां जन्मदिन है। बाबा की चर्चा केवल उनकी भक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी अद्भुत जीवनशैली के लिए भी होती है, जो कई बार विज्ञान के लिए भी कौतूहल का विषय बन जाती है।

​चिकित्सकों के अनुसार, जिस तरह बाबा एक ही मुद्रा में वर्षों से साधना कर रहे हैं, वह सामान्य मानव शरीर के लिए एक कठिन चुनौती है। वहीं, उनके जीवन से जुड़ी अफवाहों को दरकिनार करते हुए यह स्पष्ट है कि वे पूरी तरह आहार-विहीन नहीं हैं; वे दूध और फलाहार का सेवन करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि बाबा पूरी तरह दुनिया से कटे नहीं हैं। वे अपनी दिनचर्या में iPad और मोबाइल का उपयोग कर वैश्विक गतिविधियों से अपडेट रहते हैं। मौन रहकर संकेतों के माध्यम से संवाद करने वाले बाबा सत्यनारायण की यह ‘आधुनिक हठयोग’ शैली उन्हें अन्य साधुओं से अलग बनाती है।

 

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Author: News Spashat CG