August 5, 2026 4:41 am

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सिंडिकेट का ‘टॉप बॉस’ कौन? महादेव ऐप विवाद में भाजपा नेता की गिरफ्तारी से मची खलबली। 1200 करोड़ का सट्टाED की कार्रवाई न्याय है या सिंडिकेट की ‘आपसी लड़ाई’ का नतीजा?

नई दिल्ली: महादेव सट्टा ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मामले में विकास गर्ग नामक शख्स की गिरफ्तारी हुई है, जिस पर 1200 करोड़ रुपये के लेनदेन और 900 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त करने का आरोप है।

कौन हैं विकास गर्ग?

आरोपी विकास गर्ग दिल्ली भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ के चेयरमैन हैं और पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग के पुत्र बताए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि गर्ग का इस सिंडिकेट में बड़ा रसूख था और वह ऐप के जरिए प्रति माह लगभग 450 करोड़ रुपये की कमाई कर रहे थे।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

विपक्ष का आरोप है कि विकास गर्ग का सिंडिकेट के शीर्ष स्तर पर लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद कथित तौर पर ईडी को सक्रिय किया गया। वहीं, पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि महादेव ऐप के खिलाफ असली कार्रवाई उन्होंने ही शुरू की थी, जिसमें 72 FIR दर्ज कर 400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था। विपक्ष का सीधा सवाल है कि क्या यह ऐप भाजपा के संरक्षण में चल रहा है और यदि नहीं, तो अभी तक इसके मुख्य ऑपरेटरों को विदेश से भारत क्यों नहीं लाया गया?

  1. महादेव सट्टा ऐप: 1200 करोड़ के लेनदेन में भाजपा नेता का बेटा गिरफ्तार, ईडी की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली: महादेव सट्टा ऐप (Mahadev Betting App) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विकास गर्ग को गिरफ्तार किया है। विकास गर्ग, जो कि दिल्ली भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ के चेयरमैन और पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग के पुत्र हैं, पर 1200 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लेनदेन का आरोप है।

कार्यवाही के मुख्य बिंदु:

  • संपत्ति कुर्की: ईडी ने आरोपी विकास गर्ग की 900 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।
  • विपक्ष के सवाल: विपक्ष ने इसे राजनीतिक संरक्षण का मामला बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि नवनीत सहगल और हिरेन जोशी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।
  • पूर्व सरकार का दावा: छत्तीसगढ़ की पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि महादेव ऐप के खिलाफ सबसे पहले उन्होंने ही कानूनी शिकंजा कसा था, जिसके तहत हजारों बैंक खाते सीज किए गए और व्यापक स्तर पर गिरफ्तारियां की गई थीं।

​मामले में आगे की जांच जारी है और अब सभी की निगाहें ईडी के अगले कदम पर टिकी हैं।

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Author: News Spashat CG