August 5, 2026 4:41 am

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“शिक्षा का सफर, मौत की डगर: उफनती नदी के बीच ‘लटकती’ स्कूली बच्चों की जिंदगियां!”

धरमजयगढ़: एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बड़े-बड़े नारे लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत क्रोंधा की बेटियां शिक्षा के लिए हर दिन मौत को मात दे रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक भयावह वीडियो ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है, जिसमें स्कूली छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पैदल पार कर खड़गांव स्थित स्कूल जाने को मजबूर हैं।

कपड़े बदलकर पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे

ग्रामीणों के अनुसार, यह स्थिति केवल बरसात के कुछ दिनों की नहीं, बल्कि साल दर साल बनी हुई है। छात्राएं अपनी स्कूल ड्रेस भीगने से बचाने के लिए साथ में दूसरे कपड़े लेकर चलती हैं, जिन्हें नदी के उस पार जाकर बदलना पड़ता है। जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, तो इन बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है। क्या शिक्षा के अधिकार का मतलब जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंचना है?

प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल

स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन और कलेक्टर से गुहार लगाई है कि नदी पर एक स्थायी पुल बनाया जाए, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं? विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नुमाइंदों के लिए यह तस्वीर एक तमाचे जैसी है। समय रहते पुल निर्माण नहीं हुआ, तो यह लापरवाही किसी दिन किसी परिवार का चिराग बुझा सकती है।

 धरमजयगढ़ में शिक्षा की राह में ‘उफनती नदी’ बनी बाधा, पुल न होने से छात्र-छात्राओं का जीवन खतरे में

धरमजयगढ़:  के ग्राम पंचायत क्रोंधा के छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का सफर किसी जंग से कम नहीं है। स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें हर दिन उफनती नदी के बीच से पैदल गुजरना पड़ रहा है। इस दर्दनाक स्थिति का वीडियो भले ही कुछ महीने पुराना बताया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि ज़मीनी हकीकत आज भी वही है।

साइकिल छोड़ पैदल सफर करने की मजबूरी

नदी के इस पार छात्र अपनी साइकिलें खड़ी कर देते हैं और फिर जान हथेली पर रखकर नदी पार करते हैं। मानसून की दस्तक के साथ ही जलस्तर में बढ़ोतरी होना शुरू हो गई है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। नदी के तेज बहाव और जलस्तर बढ़ने के कारण कई बार बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ता है, जिसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि विद्यार्थियों के भविष्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस नदी पर शीघ्र ही स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए। वर्षों से पुल की मांग कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज न तो जनप्रतिनिधियों तक पहुंच रही है और न ही प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है। सवाल यह है कि आखिर बच्चों के स्कूल जाने का यह जोखिम भरा रास्ता कब तक बंद होगा और उन्हें सुरक्षित भविष्य कब नसीब होगा?

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Author: News Spashat CG