घरघोड़ा: मुख्यमंत्री के ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) के दावों के बीच घरघोड़ा नगर पंचायत में प्रशासनिक शिथिलता का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 15 में कृषि भूमि (खसरा नंबर 403/27, 403/28) पर माफिया द्वारा नियम-कानूनों को ताक पर रखकर विशाल व्यावसायिक गोदाम और दुकानें बनाई जा रही हैं। हद तो तब हो गई जब विभाग द्वारा 19 जून को नोटिस जारी करने के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। स्थानीय प्रशासन की चुप्पी ने भूमाफिया और भ्रष्ट तंत्र के गठजोड़ को उजागर कर दिया है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि भीषण जल संकट के दौर में, इस अवैध निर्माण को सींचने के लिए सरकारी बोरवेल का उपयोग किया जा रहा है। जनता अब सवाल पूछ रही है—क्या मुख्यमंत्री का बुलडोजर रसूखदारों के इस अवैध साम्राज्य पर चलेगा?
मुख्यमंत्री के आदेश की घरघोड़ा में अनदेखी: ‘सीएम हेल्पलाइन’ की शिकायत पर भी नहीं रुक रहा अवैध निर्माण
घरघोड़ा: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी ‘सीएम हेल्पलाइन’ योजना को स्थानीय स्तर पर पलीता लगाया जा रहा है। घरघोड़ा नगर पंचायत के वार्ड 15 में श्रीमती शारदा देवी अग्रवाल के नाम दर्ज कृषि भूमि पर बिना डायवर्शन और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की मंजूरी के अवैध निर्माण कार्य जोरों पर है। स्थानीय नागरिकों ने जब नगर पंचायत में शिकायत की, तो उसे नजरअंदाज कर दिया गया, जिसके बाद सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई। मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश (पत्र क्रमांक 25/2026) के बाद नगर पंचायत ने नोटिस (क्रमांक 552) तो जारी किया, लेकिन मौके पर कार्रवाई नदारद है। प्रशासन की यह ‘कागजी खानापूर्ति’ मुख्यमंत्री के सख्त विजन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जनता प्यासी, माफिया का निर्माण जारी: घरघोड़ा में सरकारी संसाधनों की लूट का खेल

घरघोड़ा: एक तरफ भीषण गर्मी में घरघोड़ा की जनता पानी की बूंद-बूंद के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं दूसरी तरफ वार्ड 15 में बन रहे एक अवैध व्यावसायिक गोदाम में सरकारी बोरवेल का पानी बेधड़क बहाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों की शिकायत है कि जब वे पानी की चोरी और नियम विरुद्ध हो रहे निर्माण के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन्हें अनसुना कर दिया जाता है। कृषि भूमि पर कंक्रीट का यह अवैध ढांचा न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शासकीय संपत्ति की सीधी लूट है। पीड़ित जनता अब मुख्यमंत्री से गुहार लगा रही है कि इस रसूखदार गठजोड़ को तोड़ा जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी निलंबन की कार्रवाई की जाए, ताकि आमजन का शासन पर भरोसा कायम रह सके।





