June 10, 2026 5:24 am

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प्रशासनिक गरिमा पर प्रहार: ऑन-ड्यूटी कार्यपालिक मजिस्ट्रेट से सरेराह मारपीट, एक तरफ सुशासन का नारा और दूसरी तरफ सत्ता का रसूख!

अम्बिकापुर/सीतापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है।

उप तहसील राजापुर में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर बीच सड़क पर मारपीट करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।
एक तरफ जहां सूबे में ‘सुशासन’ का नारा बुलंद किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ऑन-ड्यूटी कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के साथ हुई इस बदसलूकी और हिंसा ने दावों की पोल खोल कर रख दी है

इस घटना के बाद से प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
कर्तव्यनिष्ठा की मिली सजा? क्या अवैध धान पकड़ना बनी खुन्नस की वजह?
​क्षेत्र में चर्चा है कि सीतापुर के नए नवेले विधायक और उनके समर्थकों को शायद इस बात की पुरानी चिढ़ थी कि कर्तव्यनिष्ठ नायब तहसीलदार ने पूर्व में उनके समर्थकों का अवैध धान पकड़ा था।

प्रशासनिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि गलत कामों को प्रश्रय (संरक्षण) न देने और कानून के मुताबिक काम करने की वजह से ही अधिकारी को निशाना बनाया गया है।

यह पूरा घटनाक्रम सत्ता के अहंकार और दबाव की राजनीति का जीता-जाता उदाहरण पेश करता है, जो सरकार के सुशासन के वादों के ठीक विपरीत है।
​सरेराह टूटे शर्ट के बटन, चेहरे पर आईं चोटें
​पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के अनुसार, पूरा विवाद महज एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर को लेकर शुरू हुआ। एक महिला कार्यालय में प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर कराने आई थीं, लेकिन उस समय कार्यालय में रीडर मौजूद नहीं थे। रीडर की अनुपस्थिति में हस्ताक्षर कहां और किस प्रारूप में होना है, यह सुनिश्चित न होने के कारण अधिकारी अपने घर चले गए।
इसके बाद विधायक के पीए का फोन आया और उन्हें दबाव बनाकर राजापुर बुलाया गया। जब नायब तहसीलदार एसडीएम फागेश सिन्हा के साथ वहां पहुंचे, तो उन पर बदतमीजी का झूठा और मनगढ़ंत आरोप लगाया गया। इसके बाद विधायक के समर्थकों और स्वयं विधायक रामकुमार टोप्पो ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर अधिकारी का हाथ पकड़ा और बीच सड़क पर उनके साथ मारपीट की। इस हिंसक हमले में नायब तहसीलदार के चेहरे पर चोटें आई हैं और उनकी शर्ट के बटन तक टूट गए।
​एसडीएम बने चश्मदीद, कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पीड़ित अधिकारी
​राहत की बात यह रही कि घटना के वक्त मौके पर एसडीएम फागेश सिन्हा भी मौजूद थे, जिन्होंने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। एक प्रशासनिक अधिकारी पर हुए इस हमले के तुरंत बाद एसडीएम और पीड़ित नायब तहसीलदार सीधे अम्बिकापुर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने कलेक्टर अजीत वसंत और अन्य उच्च अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाई।
​प्रशासनिक अमले के कड़े रुख को देखते हुए, कोतवाली थाने में विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने का मामला दर्ज करा दिया गया है।
काउंटर-ब्लास्ट के तहत लगाया गया ‘अभद्र व्यवहार’ का आरोप!
​खुद को घिरता देख विधायक पक्ष की ओर से मामले को भटकाने के लिए काउंटर-ब्लास्ट की रणनीति अपनाई गई है। विधायक की चचेरी बहन सीमा धनकी ने सीतापुर थाने में नायब तहसीलदार के खिलाफ अभद्र व्यवहार की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि, नायब तहसीलदार ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया है कि विधायक की बहन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर तत्काल हस्ताक्षर करने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा था, और अपनी गलती छुपाने के लिए अब महिला कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
​निष्पक्ष जांच का भरोसा, पर सुशासन पर बड़ा दाग
​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा है कि दोनों पक्षों की ओर से रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर कानूनी कार्रवाई करेगी।
​बड़ा सवाल: एक तरफ सरकार में सुशासन का नारा लग रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में सत्ता का उपयोग संरक्षण और दबाव दोनों के लिए साफ नजर आ रहा है। यदि जनता की सेवा में दिन-रात मुस्तैद रहने वाले कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (नायब तहसीलदार) ही सुरक्षित नहीं हैं और उन पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बदले हिंसक हमले हो रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
​अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस प्रशासन बिना किसी राजनीतिक दबाव के इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए पीड़ित अधिकारी को न्याय दिला पाता है या नहीं।

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Author: News Spashat CG

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