October 29, 2026 11:13 am

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घरघोड़ा ​अवैध रेत का ‘जंगल राज’: कुटकुट नदी में वन विभाग का धावा, एक दर्जन ट्रैक्टर जब्त; रसूखदारों के दबाव से जांच पर लटकी तलवार

घरघोड़ा: लंबे समय से क्षेत्र की कुटकुट नदी से जारी अवैध रेत उत्खनन और तस्करी पर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर रेत से भरे करीब एक दर्जन ट्रैक्टरों को पकड़ा है। तस्करों ने वन क्षेत्र के भीतर से अवैध रास्ता बनाकर रखा था, जिसका उपयोग बेखौफ होकर रेत परिवहन के लिए किया जा रहा था।

​माइनिंग विभाग बना मूकदर्शक

​जहाँ एक ओर वन विभाग ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है, वहीं माइनिंग विभाग की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि अवैध खनन की जानकारी होने के बावजूद माइनिंग विभाग पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है। यदि माइनिंग विभाग ने समय रहते अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो शायद अवैध रेत तस्करों के इतने बड़े नेटवर्क को पनपने का मौका नहीं मिलता। विभागीय उदासीनता के कारण ही माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं।

​वन क्षेत्र में अवैध रास्ता बनाकर चल रहा था खेल

​जानकारी के अनुसार, रेत तस्करों ने वन विभाग की सीमाओं को धता बताते हुए जंगलों के बीच से अवैध कच्चा रास्ता तैयार कर लिया था। इसी रास्ते का उपयोग कर दिन-रात रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा था। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद वन विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया।

​रसूखदार नेताओं का दबाव, कार्रवाई पर संशय

​सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने में कुछ सफेदपोश नेताओं का भी हाथ बताया जा रहा है। ट्रैक्टर पकड़े जाने के बाद से ही मामले को रफा-दफा करने के लिए राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वन विभाग अपनी इस कार्रवाई पर कितना अडिग रहता है और क्या इन प्रभावशाली लोगों पर कोई ठोस कानूनी कार्यवाही होती है या मामला केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।

​क्षेत्र में चर्चा का विषय

​कुटकुट नदी से रेत तस्करी का यह खेल दिन-रात बेधड़क जारी था। अब जब वन विभाग ने बड़ी खेप पकड़ी है, तो प्रशासन की सख्ती और मिलीभगत को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त ट्रैक्टरों के मालिकों और इसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

​संपादकीय टिप्पणी: वन विभाग की कार्रवाई का स्वागत है, लेकिन माइनिंग विभाग की संदिग्ध निष्क्रियता और राजनीतिक संरक्षण के चलते यह लड़ाई अभी लंबी दिखती है। क्या सिस्टम माफियाओं पर लगाम लगा पाएगा, यह बड़ा प्रश्न है।

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Author: News Spashat CG

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