August 27, 2026 7:03 pm

संतोष राठिया और बूथ अध्यक्ष मौत मामला: राजनीतिक विडंबना और आत्ममंथन का दौर

रायगढ़ /छाल

संतोष राठिया: कार्यकर्ता के सम्मान और न्याय की लड़ाई का सवाल ​छाल थाना क्षेत्र के ग्राम देऊरमाल के पास भाजपा बूथ अध्यक्ष जागर साय की सड़क दुर्घटना में हुई दुखद मौत के बाद उपजा विवाद अब केवल एक स्थानीय घटना तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने राजनीतिक गलियारों में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर घरघोड़ा जनपद सदस्य और भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी संतोष राठिया की मुखर भूमिका चर्चा के केंद्र में है।

    • न्याय की मांग और राजनीतिक सवाल: बूथ अध्यक्ष की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद जब निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठी, तो आंदोलन के दौरान संतोष राठिया और प्रशासन के बीच उपजी स्थिति ने राजनीतिक हलकों में तूल पकड़ लिया।
    • संगठन के संघर्ष की पृष्ठभूमि: संतोष राठिया का राजनीतिक सफर लंबे संघर्ष से जुड़ा रहा है। विपक्ष के कार्यकाल के दौरान वे विभिन्न आंदोलनों और पदयात्राओं में अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए जाने जाते हैं।
    • कार्यकर्ता का सम्मान और संवेदनशीलता: जानकारों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद अपने ही संगठन के एक बूथ अध्यक्ष के लिए न्याय मांगना और इस दौरान इस तरह की प्रशासनिक परिस्थितियों का सामना करना गंभीर आत्ममंथन का विषय है।
    • पारदर्शिता और जांच की आवश्यकता: दुर्घटना में शामिल भारी वाहन (हाइवा) के दस्तावेजों, प्रशासनिक निगरानी और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।

​”राजनीति में कार्यकर्ता केवल एक संख्या नहीं, बल्कि संगठन की असली ताकत होता है। संकट के समय उसकी आवाज को सुनना और उसके सम्मान की रक्षा करना सरकार और संगठन दोनों की नैतिक जिम्मेदारी है।”

 

​इस पूरे प्रकरण पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि इस तरह के मामलों में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर अधिक संवाद की आवश्यकता है?

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Author: News Spashat CG