छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जिस पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय जनता पार्टी अपना ‘पितृ पुरुष’ मानती है, उनके नाम पर बने ‘अटल परिसर’ में लगी उनकी प्रतिमा को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।
- बजट और कागजी खेल: कटघोरा में अटल जी की चमचमाती हुई कांस्य (Bronze) की मूर्ति स्थापित करने के लिए 14 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट पास किया गया था।
- हकीकत बनाम कागजात: ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों में तो मूर्ति को महंगी धातु का दर्शा दिया गया, लेकिन जमीन पर सीमेंट और रेत का ढांचा खड़ा कर ऊपर से ‘ब्रांज कलर’ का स्प्रे कर दिया गया।
- पहली ही बारिश में खुला राज: जैसे ही मानसूनी बारिश शुरू हुई, पानी पड़ते ही मूर्ति पर किया गया रंग बह निकला और अंदर का सीमेंट और कंक्रीट साफ-साफ बाहर झांकने लगा।
- जनता की तीखी प्रतिक्रिया: इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग तंज कस रहे हैं कि “शुक्र है बारिश ने समय रहते राज़ धो दिए, वरना कागजों में तो सीमेंट भी सोने के भाव बिक चुका होता!”
सुशासन के दावों पर सवाल
एक तरफ भाजपा सरकार ‘सुशासन’ के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता माने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा में इस तरह का भ्रष्टाचार होना पार्टी के स्थानीय नेताओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। जनता अब मांग कर रही है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।





