सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से सामने आई एक हृदयविदारक तस्वीर ने विकास के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर स्थित सोंठी ग्राम पंचायत में हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीणों को एक महिला का शव घुटनों तक भरे कीचड़ और दलदल में से होकर श्मशान घाट तक ले जाना पड़ा।
‘विकास’ के दावों के बीच अंतिम यात्रा का अपमान
मानसून की पहली ही बारिश ने सोंठी गांव की बदहाल सड़कों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पक्की सड़क के अभाव में अंतिम यात्रा भी सम्मानजनक तरीके से संपन्न नहीं हो पा रही है। शव ले जाते समय लोग कई बार गिरने से बचे। श्मशान तक पहुंचने के रास्ते में बोराई नदी पड़ती है, जिसका जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों का जोखिम और भी बढ़ गया है।
फाइलों में कैद सड़क निर्माण का प्रस्ताव
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने मनरेगा के तहत सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा था, जो फाइलों में ही दम तोड़ रहा है। आज तक न तो सड़क बनी और न ही किसी अधिकारी ने सुध ली। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पक्की सड़क की सुविधा नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
गांव की पीड़ा: कीचड़ भरे रास्ते से गुजरी अंतिम यात्रा, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीण
सक्ती। जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोंठी ग्राम पंचायत में विकास की जमीनी हकीकत का एक मार्मिक चेहरा सामने आया है। भारी बारिश के बाद गांव के रास्तों की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य के लिए भी कीचड़ और दलदल से संघर्ष करना पड़ रहा है।
अंतिम विदाई में भी चुनौती
सोंठी गांव में हाल ही में एक महिला के निधन के बाद ग्रामीणों को उनके शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए लगभग एक किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ा। बरसात के कारण बोराई नदी का बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर मानसून में गांव का संपर्क टूट जाता है और लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
प्रशासनिक अनदेखी पर फूटा ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। जिला मुख्यालय के इतने करीब होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव, प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है। ग्रामीणों ने अब राज्य शासन और जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर सड़क निर्माण की प्रक्रिया पूरी करने की गुहार लगाई है।





