August 27, 2026 7:11 pm

धरमजयगढ़ में SECL खदान के खिलाफ मुखर हुआ विरोध, कलेक्टर से मिलने से पहले ग्रामीणों की बैठक में फूटा गुस्सा

धरमजयगढ़:

प्रस्तावित SECL ओपन कोयला खदान को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों का विरोध अब मुखर होने लगा है। जिला कलेक्टर कार्यालय में आगामी 21 अगस्त को होने वाली बैठक से ठीक पहले धरमजयगढ़ कॉलोनी में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण आपसी बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में खदान परियोजना को लेकर तीखे सवाल उठाए गए और ग्रामीणों ने एक स्वर में इसका पुरजोर विरोध दर्ज कराया।

बैठक में गूंजे विस्थापन और अस्तित्व के सवाल

 

​स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने चर्चा के दौरान साफ कहा कि प्रस्तावित ओपन कोयला खदान से उनकी उपजाऊ जमीन, खेती, रोजगार और पुश्तैनी आजीविका पर संकट आ जाएगा। बंग समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि क्षेत्र के कई परिवार पहले ही विस्थापन का दर्द झेल चुके हैं। यदि दोबारा खदान गतिविधियां शुरू हुईं, तो उनका सामाजिक और पारिवारिक अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों और ग्रामीणों के अधिकारों की बलि देकर कोई भी विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कंपनी के वाहन का बहिष्कार: “अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखेंगे”

​बैठक के दौरान एक बड़ा मुद्दा सामने आया कि प्रशासन के साथ होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए ग्रामीणों को ले जाने हेतु SECL प्रबंधन द्वारा वाहनों की व्यवस्था की जा रही है। इस पर बंग समाज और ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कंपनी की गाड़ी से जाने से साफ इंकार कर दिया।

ग्रामीणों का सवाल था— “यदि प्रभावितों की राय स्वतंत्र रूप से प्रशासन तक पहुंचानी है, तो बैठक में पहुंचने का माध्यम भी कंपनी या खदान प्रबंधन क्यों तय करे?” समाज के लोगों ने वाहन लेने से इनकार कर यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे किसी भी कंपनी के सहयोग या अप्रत्यक्ष दबाव के बिना अपनी बात सीधे प्रशासन के सामने रखेंगे।

“कार्यालय नहीं, प्रभावित गांव में हो खुली बैठक”

​ग्रामीणों ने आगामी बैठक की प्रक्रिया और उसमें कथित तौर पर SECL समर्थकों की मौजूदगी की चर्चाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि जिला प्रशासन किसी बंद कमरे, कार्यालय या निर्धारित सभाकक्ष में औपचारिकता निभाने के बजाय सीधे प्रभावित गांव में खुले मंच पर खुली बैठक आयोजित करे।

ग्रामीणों का तर्क है कि यदि बैठक उनके अपने गांव में होगी, तो वास्तविक प्रभावित किसान, महिलाएं और युवा बिना किसी डर या झिझक के अपनी जमीन, मकान और भविष्य से जुड़े मुद्दे कलेक्टर के सामने रख सकेंगे।

अब टकटकी प्रशासन के रुख पर

​SECL द्वारा वाहन उपलब्ध कराने के तरीके और बैठक की कार्यप्रणाली को लेकर खड़े हुए इन सवालों ने क्षेत्र में अविश्वास और चिंता को और गहरा कर दिया है। फिलहाल, सभी की निगाहें 21 अगस्त को होने वाली प्रशासनिक बैठक और उसमें प्रभावित ग्रामीणों के रुख पर टिकी हुई हैं कि प्रशासन उनकी इन मांगों पर क्या संज्ञान लेता है।

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Author: News Spashat CG