रायगढ़/तमनार। औद्योगिक हब रायगढ़ में अब पंचायतों की राजनीति का व्यवसायीकरण हो गया है। भुईकुरी ग्राम पंचायत में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की घटना महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि औद्योगिक ‘राखड़ माफिया’ की बढ़ती दखलंदाजी का संकेत है।
तथ्य यह है कि 15 दिनों तक पंचों को ‘अज्ञातवास’ में रखना इस बात की पुष्टि करता है कि अविश्वास के पीछे जनहित नहीं, बल्कि निजी स्वार्थ हैं। नियमतः फ्लाई ऐश डंपिंग के लिए सरपंच की NOC अनिवार्य होती है, जिसे हथियाने के लिए एक पूरी ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ रची गई। लेकिन मंगलवार को ग्रामीणों ने पंचायत भवन पर ताला जड़कर यह संदेश दिया है कि गांव की सियासत अब कॉर्पोरेट दफ्तरों से नहीं, बल्कि ग्रामीण चौपालों से तय होगी। सवाल यह है कि प्रशासन कब तक इस ‘नॉन-अकाउंटेबिलिटी’ को देखेगा?
भुईकुरी में ‘ऑपरेशन अविश्वास’ फेल: 15 दिन की बाड़ेबंदी और ग्रामीणों का ‘ताला बंद’ प्रदर्शन
तमनार। मंगलवार को तमनार ब्लॉक का भुईकुरी पंचायत भवन किसी राजनीतिक थ्रिलर फिल्म के सेट जैसा दिख रहा था। सरपंच को हटाने की पटकथा महीनों पहले लिखी गई थी, जिसमें 12 में से 10 पंचों को सुरक्षित ठिकाने पर रखा गया था।
क्या हुआ था उस दिन?
दोपहर 3:00 बजे: भारी सुरक्षा और प्रशासनिक मौजूदगी के साथ पंचों की गाड़ियां पंचायत भवन पहुंचीं।
ग्रामीणों का ‘मास्टर स्ट्रोक’: भारी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने गाड़ियों को घेर लिया और पंचायत भवन के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया।
नतीजा: पीठासीन अधिकारी नायब तहसीलदार पंकज मिश्रा को जन-आक्रोश के आगे घुटने टेकने पड़े और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि बाहरी शक्तियों द्वारा ‘व्यापारिक द्वेष’ में गांव की सरकार को गिराने की कोशिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल, अविश्वास का यह ‘थ्रिलर’ अभी और खिंचेगा, क्योंकि नई तारीख का ऐलान होना बाकी है।





