रायगढ़:
जिले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के सख्त निर्देशों के बाद अपराधियों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ शुरू किए गए “ऑपरेशन अंकुश” के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। छाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत रायगढ़-कोरबा बॉर्डर पर स्थित ग्राम धसकामुड़ा में चल रहे एक बड़े जुआ फड़ पर पुलिस ने अचानक दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 33 जुआरियों को रंगे हाथों धर दबोचा, जबकि करोड़ों के अवैध कारोबार का संचालन करने वाले मुख्य सरगना मौके से फरार होने में कामयाब हो गए।
मेला स्थल की आड़ में चल रहा था बड़ा खेल
पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि धसकामुड़ा बस्ती के छोर पर मेला स्थल के बाहर सुनसान इलाके में बड़े पैमाने पर ‘खुडखुडिया’ जुआ खेला जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
एडिशनल एसपी अनिल सोनी और एसडीओपी खरसिया प्रभात पटेल के मार्गदर्शन में तथा थाना प्रभारी छाल निरीक्षक नासिर खान के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से पूरे इलाके को घेरकर दबिश दी, जिससे जुआरियों को भागने का मौका नहीं मिला। पकड़े गए सभी आरोपी घरघोड़ा, तमनार, डभरा और जैजैपुर क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
₹90 लाख से अधिक की संपत्ति जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में नगद और लग्जरी वाहन बरामद किए हैं। जप्त की गई सामग्री का विवरण इस प्रकार है:
- नकद राशि: जुआ फड़ से ₹57,140 नगद बरामद।
- लग्जरी वाहन: जुआ खेलने पहुंचे रईसों की एक इनोवा, दो बोलेरो, दो अर्टिगा, एक KIA और एक ऑल्टो कार (कुल 7 गाड़ियां)। जप्त वाहनों और कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब ₹90 लाख आंकी गई है।
- अन्य सामग्री: मौके से 5 गैस लाइट भी जप्त की गई हैं।
छाल पुलिस ने सभी 33 आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 6 के तहत पांच अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर लिए हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजने की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
बड़ा सवाल: पुलिस के हाथ लगे सिर्फ गुर्गे, मास्टरमाइंड ‘रंगा-बिल्ला’ फिर फरार
एक तरफ जहां छाल पुलिस इस बड़ी कार्रवाई के बाद अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी तरफ इस अवैध कारोबार के असली चेहरों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चर्चा है कि इस बड़े नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य मास्टरमाइंड ‘रंगा-बिल्ला’ हर बार की तरह इस बार भी पुलिस की पकड़ से कोसों दूर हैं।
इतनी बड़ी घेराबंदी और पुलिसिया दबिश के बावजूद मुख्य सरगनाओं का पहले ही फरार हो जाना पुलिस के मुखबिरी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। आम चर्चा यह है कि पुलिस के जाल में सिर्फ ‘छोटी मछलियां’ (प्यादे) फंसी हैं, जबकि असली ‘बड़े मगरमच्छ’ सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गए।
एसएसपी की दो टूक चेतावनी
मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध जुआ, सट्टा और अन्य असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन अंकुश’ के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने दो टूक कहा है कि कानून व्यवस्था भंग करने या अवैध धंधों को बढ़ावा देने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। बहरहाल, देखना यह होगा कि पुलिस इन फरार मास्टरमाइंडों तक कब तक पहुंच पाती है।





