August 5, 2026 7:59 am

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सिंघल इस्पात जनसुनवाई: प्रशासनिक छलावा साबित, ग्रामीणों के आक्रोश से घबराकर भागा प्रशासन!

रायगढ़: रायगढ़ पूर्वी अंचल के सियारपाली, कोटरलिया और पतरापाली में मेसर्स सिंघल इस्पात एंड पावर लिमिटेड के नए प्लांट के लिए आयोजित जनसुनवाई हंगामे की भेंट चढ़ गई। स्थानीय ग्रामीणों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने प्लांट के विस्तार को लेकर उग्र विरोध दर्ज कराया। विरोध के कारण प्रशासन को सुबह 11 बजे शुरू हुई सुनवाई को समय से पूर्व ही संपन्न घोषित करना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने प्रभावित गांवों को सूचना नहीं दी और उद्योगपतियों के इशारे पर जनसुनवाई को महज खानापूर्ति के रूप में आयोजित किया।

 सिंघल इस्पात पर लगे गंभीर आरोप: जमीन वापसी या मुआवजे की मांग, सीएसआर फंड में घोटाले का खुलासा

​जनसुनवाई के बहाने सामने आई सिंघल इस्पात की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का दावा है कि 20-25 साल पहले कौड़ियों के दाम अधिग्रहित की गई जमीन पर प्लांट न लगाकर कंपनी ने नियमों का उल्लंघन किया है। अब मांग उठ रही है कि या तो जमीन वापस की जाए या वर्तमान बाजार मूल्य पर मुआवजा दिया जाए। वहीं, सीएसआर फंड के नाम पर भी बड़ा खेल सामने आया है; आरोप है कि स्थानीय प्रभावितों का हक रायपुर, कोरबा और बिलासपुर में खर्च किया जा रहा है। साथ ही, उच्च पदों पर स्थानीय युवाओं के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दिए जाने से युवाओं में भारी आक्रोश है।

 पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य रिपोर्ट

 प्रदूषण की ‘काली चादर’ में सिमटा रायगढ़, केलो नदी को बनाया ‘राखड़ डंपिंग यार्ड’

: तराई माल में सिंघल इस्पात के मौजूदा प्लांट से फैल रहे प्रदूषण ने पूरे अंचल का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि केलो नदी अब जीवनदायिनी नहीं, बल्कि प्लांट के कचरे का कूड़ेदान बन गई है। फ्लाई ऐश (राखड़) और जहरीले धुएं से जैव विविधता और लोगों का स्वास्थ्य खतरे में है। ग्रामीणों का तर्क है कि जब वर्तमान प्लांट ही पर्यावरण को तबाह कर रहा है, तो नए विस्तार की अनुमति देना पूरे अंचल को ‘प्रदूषित नर्क’ में बदलने जैसा है।

“अब चुप नहीं बैठेंगे”: 14 पंचायतों का अल्टीमेटम, 

​जनसुनवाई में उमड़े जनसैलाब ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रायगढ़ अब मूक दर्शक नहीं रहेगा। 14 पंचायतों के ग्रामीणों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि यह जनसुनवाई रद्द नहीं की गई और नए प्लांट पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह विरोध एक विकराल जन-आंदोलन का रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिजली बिल बकाया होने के बावजूद उद्योगपतियों को मिल रही सरकारी छूट, प्रशासन की मिलीभगत को उजागर करती है। क्या सरकार उद्योगपतियों का मुनाफा देखेगी या रायगढ़ के नागरिकों की सांसें?

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Author: News Spashat CG