August 5, 2026 10:16 am

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अदानी विस्तार: कागजी दावे बनाम जमीनी हकीकत।फाइलों में ‘ग्रीन’ धरातल पर ‘ग्रे’: क्या रायगढ़ के साथ हो रहा है पर्यावरणीय खिलवाड़?

रायगढ़ में अदानी पावर लिमिटेड अपने मौजूदा 2200 मेगावाट संयंत्र के साथ 1600 मेगावाट की दो नई इकाइयां जोड़ने जा रहा है। कुल 3800 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना के लिए अतिरिक्त भूमि, पानी और कोयले की भारी मांग होगी।

मुख्य चिंताएं:

  • फ्लाई ऐश का प्रबंधन: कागजों पर 100% उपयोग का दावा, लेकिन हकीकत में जंगलों और खेतों में राख के ढेर।
  • संसाधनों पर दबाव: कुल कोयला खपत 16.52 मिलियन टन और पानी की आवश्यकता 82 एमसीएम तक पहुंचने की संभावना।
  • जनता का सवाल: क्या नए विस्तार से पहले मौजूदा प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन का हिसाब दिया जाएगा?

​आगामी जनसुनवाई केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जवाबदेही की परीक्षा होगी। रायगढ़वासी पूछ रहे हैं—क्या विकास की कीमत हमारी सेहत और जल स्रोतों से चुकाई जाएगी?

 “जनसुनवाई या जवाबदेही का इम्तिहान”: क्या रायगढ़ में प्रदूषण पर नियंत्रण के दावे केवल फाइलों तक सीमित हैं?

​रायगढ़ की धरती पर एक बार फिर औद्योगिक विस्तार की पटकथा लिखी जा रही है, लेकिन इस बार सवाल बहुत तीखे हैं। अदानी पावर के 1600 मेगावाट विस्तार के प्रस्ताव के साथ ही जिले की पर्यावरणीय स्थिति पर गंभीर संकट के बादल गहरा गए हैं।

​परियोजना के अनुसार अतिरिक्त 2.66 मिलियन टन फ्लाई ऐश पैदा होगी। दावे हैं कि इसका ‘शत-प्रतिशत’ उपयोग होगा, लेकिन जिले के नाले, खेत और वन क्षेत्र इस दावे की पोल खोल रहे हैं। आखिर उन फ्लाई ऐश के ढेरों का जिम्मेदार कौन है जो आए दिन किसानों की उर्वरता और लोगों की सांसों को प्रभावित कर रहे हैं?

​यह विस्तार केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक ऑडिट की मांग करता है। जनसुनवाई में उद्योग जगत और प्रशासन को जवाब देना होगा कि यदि निगरानी प्रभावी है, तो उल्लंघन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह समय है जब कागजी दावों से इतर, धरातल पर पर्यावरणीय शर्तों की सत्यता को सार्वजनिक किया जाए।

 पावर विस्तार: फ्लाई ऐश के बढ़ते ढेरों के बीच रायगढ़ में जनसुनवाई की तैयारी

​रायगढ़। अदानी पावर लिमिटेड के नए विस्तार प्रस्ताव ने जिले के पर्यावरण प्रेमियों और किसानों को चिंतित कर दिया है। जहां कंपनी 3800 मेगावाट तक क्षमता बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनता मौजूदा संयंत्र से होने वाले प्रदूषण और फ्लाई ऐश प्रबंधन की विफलता पर सवाल खड़े कर रही है।

जनता की प्रमुख मांगें:

  1. ​मौजूदा संयंत्र की पर्यावरणीय शर्तों का स्वतंत्र सामाजिक एवं पर्यावरणीय ऑडिट सार्वजनिक किया जाए।
  2. ​100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग के दावों की जमीनी हकीकत का खुलासा हो।
  3. ​महानदी से अतिरिक्त 32 एमसीएम पानी लेने का स्थानीय जल संसाधनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका स्पष्ट ब्योरा मिले।

​विकास जरूरी है, लेकिन वह विकास विनाशकारी न हो—यही रायगढ़ वासियों का मूल मंत्र है। आगामी जनसुनवाई में प्रशासन और उद्योग को इन कठिन सवालों का तथ्यात्मक उत्तर देना होगा।

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Author: News Spashat CG