स्थान: कारगिल से लेह-लद्दाख की बर्फीली और जोखिम भरी सड़कें
यात्री: विनय देवांगन (रायगढ़, छत्तीसगढ़)
मिशन: ‘नशा मुक्त भारत’ (नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो)
🎒 न ठिकाने की फिक्र, न खाने की चिंता: बस साइकिल और एक जिद्दी सपना

कल्पना कीजिए एक ऐसी सुबह की, जहाँ तापमान माइनस में हो, हवाएं हड्डियों को चीरती हुई निकल जाएं, सीने में ऑक्सीजन की कमी से सांस उखड़ने लगे और पैर के नीचे सिर्फ पथरीली, ढलान भरी और दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कें हों। इस खौफनाक मंजर में कोई आम इंसान एक कदम भी आगे बढ़ाना पसंद नहीं करेगा। लेकिन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के रहने वाले विनय देवांगन इसी नर्क जैसी खूबसूरत वादियों में अपनी साइकिल के दो पहियों पर सवार होकर इतिहास लिख रहे हैं।
उनके पास न रहने के लिए कोई आरामदायक कमरा है, और न ही यह चिंता कि अगली थाली कहाँ से मिलेगी। जेब में भारी-भरकम पूंजी नहीं, बस कंधे पर एक छोटा सा बस्ता और अंतरात्मा की वो आवाज है जो युवाओं को नशे के अंधकार से निकालकर उजाले की तरफ लाना चाहती है।
🗺️ फर्श से अर्श तक: आस्था, तपस्या और क्रांति का संगम
विनय की यह यात्रा महज़ घूमने का शौक नहीं है, यह एक आध्यात्मिक तपस्या और सामाजिक क्रांति का अनोखा मिश्रण है। कारगिल और लेह-लद्दाख के इन दुर्गम रास्तों पर पहुँचने से पहले विनय देश के कोने-कोने को अपनी साइकिल से नाप चुके हैं:
- द्वादश ज्योतिर्लिंग फतह: देश के सभी 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के द्वार पर वे अपनी साइकिल लेकर पहुंचे और देश की शांति व शुद्धि की प्रार्थना की।
- चार धाम की परिक्रमा: सनातन संस्कृति के सबसे पवित्र चार धामों के दर्शन कर उन्होंने अपनी इस महायात्रा को आध्यात्मिक ऊर्जा दी।
- लंबा संघर्ष और रिकॉर्ड: उनकी यह साइकिल महायात्रा तीन चरणों में विभाजित है—जिसमें पहली यात्रा 1 महीने की, दूसरी यात्रा 11 महीने की और अभी तीसरी यात्रा को 3 महीने पूरे हो चुके हैं। वे अब तक कुल 18,500 किलोमीटर की कठिन साइकिल यात्रा पूरी कर चुके हैं। उनकी यह यात्रा कब और कहाँ समाप्त होगी, इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं है, क्योंकि उनका सफर अभी जारी है।
- रोज़ाना का कड़ा संघर्ष: खराब रास्ते, मौसम की मार और मानसिक-शारीरिक थकान को पीछे छोड़ते हुए वे हर दिन अपने तय लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हैं।
⚡ आधुनिक युवाओं के लिए एक खुला संदेश
आज की पीढ़ी छोटी-छोटी परेशानियों—जैसे करियर का दबाव, असफलता का डर या रिश्तों की उलझन—में घबराकर अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो जाती है। ऐसे दौर में विनय देवांगन का यह सफर उन लोगों के लिए एक जीवंत मिसाल है जो संसाधनों के अभाव का रोना रोते हैं।
विनय ने साबित कर दिया है कि अगर सीने में आग हो और इरादों में सच्चाई, तो बिना संसाधनों के भी शून्य से शिखर तक का साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है।
“नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो”—यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इस माटी के लाल के बिखरते पसीने और हर एक पैडल की गूंज है, जो आने वाले कल के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी।





