August 27, 2026 7:04 pm

1,000 से अधिक संविदा शिक्षकों के महा-आंदोलन से 40 स्कूलों में लटके ताले

रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी और हिंदी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से प्रदेशभर के कई स्कूलों में अघोषित तालाबंदी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। रायपुर के तूता धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक और कर्मचारी संघ के बैनर तले दो दिवसीय महा-आंदोलन शुरू हो गया है।

​सरगुजा संभाग में सबसे बुरा असर

​इस विरोध प्रदर्शन में अकेले सरगुजा संभाग से लगभग 1,000 शिक्षक और कर्मचारी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इसके चलते पूरे संभाग के करीब 40 स्कूलों में अध्यापन कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अकेले सरगुजा जिले में ही ऐसे 20 स्कूल संचालित हैं, जिनकी पूरी प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था इन्हीं संविदा कर्मचारियों के भरोसे टिकी हुई है।

​दर्द भरी तस्वीरें: गोद में दुधमुंहे बच्चे और हाथों में तख्तियां

​तूता धरना स्थल से सामने आ रही तस्वीरें झकझोर देने वाली हैं। महिला और पुरुष शिक्षक अपने दुधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर पंडालों में डटे हुए हैं। मासूम बच्चों के हाथों में ‘प्लीज सेव माय फ्यूचर’ (कृपया मेरा भविष्य बचाएं) लिखी तख्तियां उनके परिवारों के भविष्य की अनिश्चितता को बयां कर रही हैं। पूरा परिसर “शिक्षकों का सम्मान करो” और “न्यायपूर्ण वेतनमान दो” के नारों से गूंज रहा है।

​संघ की 5 प्रमुख मांगें

​संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन में निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी गई हैं:

  • संविलियन: कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति की व्यवस्था को समाप्त कर पूरे विद्यालय और स्टाफ का संविलियन सीधे शिक्षा विभाग में किया जाए।
  • नियम व वेतन वृद्धि: मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में संविदा नियम लागू किए जाएं और हर साल नियमानुसार वार्षिक वेतन वृद्धि (DMF से नियुक्त कर्मियों सहित) दी जाए।
  • पद का दर्जा: ग्रंथपालों को पुनः शिक्षक ग्रंथपाल (लेवल-8) का सम्मानजनक दर्जा दिया जाए।
  • सेवा सुरक्षा और बीमा: कर्मचारियों के लिए नियमित PF कटौती, स्पष्ट सेवा सुरक्षा नीति और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में 50 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर सुनिश्चित किया जाए।

​5 साल से मानदेय में एक भी बढ़ोतरी नहीं

​हड़ताल पर बैठे शिक्षकों का कहना है कि वे बीते 5 वर्षों से पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इन 5 सालों में उनके मानदेय में एक प्रतिशत का भी इजाफा नहीं हुआ है। आज के इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में बेहद सीमित आय के साथ परिवार का भरण-पोषण करना असंभव हो गया है, जिसके चलते उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा है।

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Author: News Spashat CG