रायगढ़/छाल
प्रकृति के सच्चे संरक्षक और अपनी समृद्ध संस्कृति के संवाहक आदिवासियों का महापर्व ‘विश्व आदिवासी दिवस’ 9 अगस्त 2026 को ग्राम छाल में अभूतपूर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस आयोजन ने स्थानीय संस्कृति, परंपरा और एकता का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

- विशाल जनसैलाब: कार्यक्रम में किसी मेले जैसा माहौल देखने को मिला। छाल और आसपास के ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में ग्रामीणजन, युवा साथी, और माताएं-बहनें पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं।
- सांस्कृतिक वैभव: आदिवासी लोक नृत्य, पारंपरिक गीत और वाद्ययंत्रों की थाप ने पूरे वातावरण को आदिवासी रंग में रंग दिया।
- मुख्य अतिथि: कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने पहुंचे धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक मा. श्री लालजीत सिंह राठिया जी। उन्होंने अपने संबोधन में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और समाज के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया।
- अध्यक्षता: ग्राम पंचायत छाल की सरपंच मा. श्रीमती मालती निलंबर राठिया जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आगत अतिथियों और ग्रामीणों का स्वागत किया।
- विशिष्ट उपस्थिति: इस गरिमामयी अवसर पर क्षेत्र के जनपद सदस्य, विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचगण, उपसरपंच और समाज के प्रबुद्ध वरिष्ठ नागरिकों ने विशेष रूप से शिरकत की।
मुख्य बातें और संदेश
- जल-जंगल-जमीन की रक्षा: कार्यक्रम के केंद्र में मूल आदिवासियों के अधिकारों और उनकी जीवनरेखा—जल, जंगल और जमीन—की रक्षा का संकल्प रहा। वक्ताओं ने प्रकृति के साथ आदिवासियों के सह-अस्तित्व को रेखांकित किया।
- युवाओं की भागीदारी: युवाओं की भारी उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि आज की पीढ़ी अपनी संस्कृति और जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है।
यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और उनके अधिकारों की पुनः पुष्टि का एक ऐतिहासिक मंच साबित हुआ।





