रायगढ़/ खरसिया
खरसिया के आईडीएफसी बैंक में इन दिनों बैंकिंग सेवाओं से ज्यादा ‘नाटक’ चर्चा का विषय बना हुआ है। चार महीने से बिजली बिल का भुगतान न करने के कारण बिजली विभाग ने बैंक की बत्ती गुल कर दी, जिसके बाद शुरू हुआ लीपापोती और ड्रामे का असली खेल।
तीन दिनों तक बैंक बिना बिजली के अंधेरे में डूबा रहा, लेकिन बैंक प्रबंधन ने अपनी किरकिरी बचाने के लिए जनता को सच बताने के बजाय एक शातिर चाल चली। उन्होंने ग्राहकों को यह झांसा देने के लिए कि सर्वर डाउन है, बाहर ‘लिंक फेल’ का बोर्ड लटका दिया। लोग धूप और गर्मी में बैंक के चक्कर काटते रहे और अंदर बैठकर कर्मचारी अंधेरे में काम का दिखावा करते रहे।
जब ग्राहकों को माजरा समझ आया कि मामला ‘लिंक फेल’ का नहीं बल्कि ‘बिजली बिल फेल’ का है, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। बैंक परिसर में ग्राहकों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामे का शोर जैसे ही ऊपर तक पहुंचा, बैंक प्रबंधन की नींद टूटी। तुरंत बिजली विभाग से संपर्क किया गया और बिल का कुछ हिस्सा चुकाने (पार्ट पेमेंट) की गिड़गिड़ाहट के बाद आखिरकार तीन दिन बाद बिजली बहाल हो सकी।
यह पूरा वाकया सिर्फ एक बिजली बिल का नहीं, बल्कि ग्राहकों के भरोसे के साथ सरेआम खिलवाड़ का है। एक प्रतिष्ठित बैंक का इस तरह की बचकानी और गैर-जिम्मेदार हरकत करना उसकी साख पर बड़ा सवालिया निशान छोड़ गया है।





