August 5, 2026 3:46 am

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घरघोड़ा अशरफ बेग मामले में हाई कोर्ट का कड़ा रुख न्याय की जीत: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शासन पर ठोका 25,000 का जुर्माना

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तहसील से एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकरण सामने आया है, जहाँ कार्यपालिक दंडाधिकारी (तहसीलदार) की मनमानी और विधि-विरुद्ध कार्रवाई के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शासन पर पच्चीस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों की तानाशाही पर एक करारा प्रहार है।

​प्रकरण का विवरण

  • शिकायत और पुलिस कार्रवाई: दिनांक 05.10.2025 को फिरोज कश्यप द्वारा याचिकाकर्ता अशरफ बेग के विरुद्ध घरघोड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस पर कार्रवाई करते हुए घरघोड़ा पुलिस ने तहसीलदार के समक्ष भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 130 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
  • तहसीलदार का आदेश: तहसीलदार द्वारा इस मामले में एक लाख रुपये की जमानत राशि एवं जमानतदार प्रस्तुत करने का आदेश पारित किया गया।
  • जमानत देने के पश्चात भी निरुद्ध: याचिकाकर्ता द्वारा नियमानुसार उक्त जमानत राशि प्रस्तुत कर दिए जाने के बावजूद, कार्यपालिक दंडाधिकारी/तहसीलदार द्वारा अशरफ बेग को जेल में निरुद्ध करने का आदेश जारी कर दिया गया।

​उच्च न्यायालय में न्याय की गुहार

​अशरफ बेग ने इस अन्याय के विरुद्ध माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष अपने योग्य अधिवक्ताओं—श्री सुनील ठाकुर और श्री आशुतोष मिश्रा—के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की।

  • प्रशासन में हड़कंप: याचिका प्रस्तुत होने की जानकारी प्राप्त होते ही तहसीलदार द्वारा आनन-फानन में रिहाई का आदेश जारी किया गया।
  • शासन को नोटिस: मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने शासन के विरुद्ध नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।

​अधिवक्ताओं के तर्क और न्यायालय का निर्णय

​अशरफ बेग के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया कि गिरफ्तारी की सूचना न देना, कोई संज्ञेय अपराध आकर्षित न होना और जमानत देने के बाद भी जेल भेजना पूरी तरह से मनमानीपूर्ण, विधि के विरुद्ध तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन है।

​मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान, माननीय उच्च न्यायालय के युगलपीठ—माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा तथा माननीय न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल—ने तहसीलदार के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों की अवहेलना माना।

​न्यायालय के निर्देश

  • ​माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए शासन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है।
  • ​शासन पर 25,000/- (पच्चीस हजार) रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
  • ​यह राशि आदेश की तिथि से 30 दिवस के भीतर याचिकाकर्ता को प्रदान करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

​याचिकाकर्ता अशरफ बेग का बयान

“न्यायपालिका पर हमारा भरोसा और अधिक मजबूत हो गया है। प्रशासनिक पद पर बैठे कुछ अधिकारियों द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा था। माननीय उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले ने यह साबित कर दिया है कि कानून और संविधान से ऊपर कोई नहीं है। मैं अपने योग्य अधिवक्ताओं श्री सुनील ठाकुर और श्री आशुतोष मिश्रा का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने पूरी मजबूती के साथ मेरा पक्ष रखा।”

 

​यह ऐतिहासिक निर्णय कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों के लिए न्याय और कानून के पालन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

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Author: News Spashat CG