August 5, 2026 11:51 am

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​युवा कांग्रेस नेता उस्मान बेग के नेतृत्व में SDM को सौंपा ज्ञापन; बोले– “हक की लड़ाई की यह पहली दस्तक है”पोरडा-चिमटापानी कोल प्रोजेक्ट का भारी विरोध:

घरघोड़ा/रायगढ़:

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड में प्रस्तावित पोरडा-चिमटापानी कोल परियोजना के खिलाफ प्रभावित ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। परियोजना के लिए शुरू हो रही भूमि अधिग्रहण और सर्वेक्षण प्रक्रिया के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

​बुधवार को युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष और पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष उस्मान बेग के नेतृत्व में प्रभावित गांवों के सैकड़ों लोग तहसील कार्यालय पहुंचे। यहाँ उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और तहसीलदार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर साफ कहा कि जब तक ग्रामीणों की मांगें लिखित में पूरी नहीं होतीं, तब तक क्षेत्र में किसी भी तरह का सर्वे नहीं होने दिया जाएगा।

2025 के अधूरे वादों पर उठे सवाल

​ग्रामीणों का आरोप है कि साल 2025 में सिर्फ पोरडा गांव में सर्वे किया गया था, लेकिन आज तक SECL या प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रभावितों की सूची क्या है, मुआवजा कितना मिलेगा और पुनर्वास कहां होगा। बिना ग्रामीणों को विश्वास में लिए अन्य गांवों (कठरापाली, कांटाझरिया, सिंघनपुर, कोनपारा, चिमटापानी) में सर्वे शुरू करना न्यायसंगत नहीं है।

आर-पार के मूड में ग्रामीण, रखीं ये प्रमुख मांगें:

    1. चार गुना मुआवजा: वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर कम से कम 4 गुना मुआवजा मिले। मकान, कुआं, पेड़ और फसलों का अलग से एकमुश्त भुगतान हो।
    2. 70% स्थानीय रोजगार: हर प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी मिले। ठेका व आउटसोर्सिंग कार्यों में 70% स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
    3. एकमुश्त सामूहिक पुनर्वास: पूरे गांव को एक साथ सर्वसुविधायुक्त (बिजली, पानी, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र) पक्के मकानों में शिफ्ट किया जाए ताकि सामाजिक एकता न टूटे।
    4. ग्रामसभा की लिखित सहमति (MoU): जब तक ग्रामसभा में लिखित समझौता नहीं होता, कोई काम शुरू न हो।

“हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर हमारी जमीन और अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह सिर्फ ज्ञापन नहीं, जल-जंगल-जमीन को बचाने के जनआंदोलन की पहली दस्तक है।”

उस्मान बेग, युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष, रायगढ़

 

​इस आंदोलन की गूंज अब जिला मुख्यालय तक पहुंच चुकी है। ज्ञापन की प्रतियां कलेक्टर, एसपी और SECL के महाप्रबंधक को भी भेजी गई हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस सुलगते मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।

जमीन, आजीविका और अस्तित्व का संकट: क्यों पोरडा-चिमटापानी परियोजना के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं 6 गांवों के किसान?

SECL की प्रस्तावित पोरडा-चिमटापानी कोल परियोजना शुरू होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। घरघोड़ा विकासखंड के पोरडा, कठरापाली, कांटाझरिया, सिंघनपुर, कोनपारा और चिमटापानी जैसे कृषि प्रधान गांवों के हजारों किसानों के सामने आज अपनी आजीविका और सामाजिक अस्तित्व को बचाने की चुनौती खड़ी है। यही कारण है कि अब इस पूरे इलाके में जनचर्चा और आक्रोश की लहर तेज है।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान

​आंदोलन की अगुवाई कर रहे स्थानीय नेता उस्मान बेग ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि SECL को सबसे पहले अपनी पूरी योजना को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना चाहिए। ग्रामीणों को अंधेरे में रखकर किया जाने वाला कोई भी सर्वे लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता।

पेचीदा हैं कानूनी और जमीनी मसले

​इस पूरे विवाद में कुछ ऐसे बुनियादी मुद्दे हैं जिन्हें प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है:

      • राजस्व अभिलेखों की गड़बड़ी: जमीन अधिग्रहण से पहले कई किसानों की जमीनों का आपसी बंटांकन (विभाजन) और रिकॉर्ड दुरुस्त होना बाकी है।
      • लंबित वन अधिकार दावे: कई आदिवासी और पारंपरिक वन निवासी परिवारों के वन अधिकार दावे अभी भी लंबित हैं। नियमतः, इनका निराकरण किए बिना सर्वे या अधिग्रहण नहीं किया जा सकता।

​प्रशासन और SECL के लिए अब आगे की राह आसान नहीं होगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ‘ग्रामसभा की सर्वोच्चता’ और ‘लिखित समझौते (MoU)’ के बिना एक इंच जमीन भी हिलने नहीं देंगे।

 पोरडा-चिमटापानी कोल प्रोजेक्ट पर ग्रामीणों का बड़ा अल्टीमेटम!

​📌 कहाँ का है मामला?

रायगढ़ जिले का घरघोड़ा विकासखंड, जहाँ प्रस्तावित कोल माइंस प्रोजेक्ट को लेकर प्रभावित गांवों में भारी आक्रोश है।

​📌 किसने संभाली कमान?

युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष उस्मान बेग के नेतृत्व में प्रभावित ग्रामवासियों ने एकजुट होकर SDM और तहसीलदार को घेरा।

​📌 क्या है मुख्य विवाद?

      • ​बिना पूरी जानकारी और मुआवजा नीति स्पष्ट किए प्रशासन अन्य गांवों में सर्वे शुरू करने की तैयारी में है।
      • ​साल 2025 में हुए पोरडा गांव के सर्वे की रिपोर्ट भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई।

​📌 ग्रामीणों की ‘नो-कॉम्प्रोमाइज’ शर्तें:

      • ​💰 बाजार दर से 4 गुना मुआवजा और एकमुश्त भुगतान।
      • ​💼 प्रभावित परिवारों को स्थायी नौकरी + 70% स्थानीय युवाओं को रोजगार।
      • ​🏡 पूरे गांव का एक साथ सर्वसुविधायुक्त पुनर्वास
      • ​📜 ग्रामसभा की उपस्थिति में लिखित MoU के बाद ही कोई सर्वे।

​🔴 चेतावनी: उस्मान बेग ने साफ लफ्जों में कहा है— “यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक बड़े और उग्र जनआंदोलन का रूप लेगा।”

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Author: News Spashat CG