रायगढ़ / छाल:
रायगढ़ जिले के छाल थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था इन दिनों गहरी नींद में नजर आ रही है। रेत के अवैध कारोबार और वर्चस्व की लड़ाई अब खुलेआम गुंडागर्दी, मारपीट और लूटपाट तक पहुँच चुकी है। ताजा मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध तो दर्ज कर लिया है, लेकिन 12 दिन पुरानी घटना पर दो हफ्ते बाद एफआईआर होना और आरोपियों का बेखौफ घूमना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
📌 क्या है पूरा मामला?
पीड़ित मालिकराम डनसेना (उम्र 27 वर्ष, निवासी बड़े डूमरपाली, खरसिया) द्वारा छाल थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, वह गत 6 अगस्त 2026 को ग्राम बरभौना मार्ग स्थित ठाकुरदेव देवरास गेट के पास अपने वाहन चालकों को खाना पहुँचाने गया था।
इसी दौरान घात लगाए बैठे बदमाशों ने रास्ते में चालकों को घेरकर धमकाया और डीजल के नाम पर पैसे छीन लिए। बीच-बचाव करने पहुँचे प्रार्थी पर आरोपियों ने जानलेवा हमला कर दिया, जेब से ₹2200 नगद लूट लिए और आतंक फैलाने के उद्देश्य से वाहनों के टायरों की हवा तक निकाल दी।
👥 नामजद आरोपी
इस सनसनीखेज वारदात में निम्नलिखित नामजद आरोपी शामिल हैं:
- शेखर डनसेना
- दुर्गा डनसेना
- गुलाब डनसेना
- कोमल दर्शन
- विक्रम महंत
- प्रेम राठिया
- खिलेश्वर उर्फ लिटु कुम्हार एवं अन्य।
⚠️ पुराने मामलों के बावजूद पुलिस की सुस्ती पर सवाल
- दो महीने पहले भी दर्ज हुई थी FIR: सूत्रों और रिकॉर्ड के अनुसार, इस गिरोह के कई सदस्यों पर महज दो माह पूर्व ही ड्राइवरों से ₹700 प्रति गाड़ी अवैध वसूली और रंगदारी का मामला छाल थाने में दर्ज हो चुका है। इसके बावजूद इन पर कोई ठोस कानूनी शिकंजा नहीं कसा जा सका है।
- दो हफ्ते बाद जागी पुलिस? घटना 6 अगस्त की है, लेकिन पुलिस ने इसमें एफआईआर दर्ज करने के लिए 19 अगस्त 2026 तक का लंबा वक्त लगा दिया। इतने दिनों की देरी क्यों हुई, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
जिले के आला अधिकारी भले ही अपराध नियंत्रण और सख्त पुलिसिंग के लाख दावे करें, लेकिन छाल क्षेत्र में बेलगाम हो चुके रेत माफिया और असामाजिक तत्व आम जनता और ट्रांसपोर्टरों के मन में खौफ पैदा कर रहे हैं। देखना यह होगा कि इस मामले में पुलिस केवल खानापूर्ति करती है या फिर इन बेखौफ बदमाशों पर कोई कड़ा एक्शन लिया जाता है।





